अब हर सीएचसी में खुलेगा जन औषधि केंद्र
- - इन केंद्रों की निगरानी के लिए विकसित किया जा रहा तंत्र
लखनऊ। यूपी में अब हर सीएचसी में जन औषधि केंद्र खोला जाएगा। इन केंद्रों की निगरानी के लिए तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। यहां दवाएं न मिलने पर वेंडरों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में अब हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में जन औषधि केंद्र खुलेगा। इससे मरीजों को सस्ती दर पर जेनेरिक दवाएं और उपकरण मिल सकेंगे। केंद्र खोलने के लिए जिला स्तर पर एजेंसी तय की जा रही है। इन केंद्रों की निगरानी के लिए तंत्र भी विकसित किया जा रहा। शासन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को नए खुलने वाले जन औषधि केंद्रों के लाइसेंस की प्रक्रिया वरीयता के आधार पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में अब तक निजी क्षेत्र में करीब 2700 जन औषधि केंद्र हैं। कुछ मेडिकल कॉलेजों व जिला अस्पतालों में भी केंद्र हैं। अब राज्य सरकार ने सभी सीएएसी में जन औषधि केंद्र खोलना अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं जिन जिला व विशिष्ट अस्पतालों में अभी ये केंद्र नहीं हैं, वहां भी ये केंद्र खोले जाएंगे। प्रदेश में अभी 108 जिला व संयुक्त अस्पताल, 259 विशिष्टि अस्पताल और 972 सीएचसी हैं। 3735 प्राथमिक और ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र भी हैं।
कहां की मिली जिम्मेदारी
स्टेट एजेंसी फॉर कंप्रेहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विस (साचीज) ने पहले चरण में सभी सीएचसी को मिलाकर 1110 जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी की है। मई के अंत तक इन सभी केंद्रों को शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। जन औषधि केंद्रों के लिए मंडल के बजाय जिला स्तर पर वेंडर चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दवाएं न मिलने पर वेंडर पर लगेगा जुर्माना
संबंधित वेंडरों को आवंटित स्थलों के लिए भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई) पोर्टल पर आवेदन करने का निर्देश दिया गया है। वेंडर की यह जिम्मेदारी होगी कि आवंटित अस्पताल के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से लाइसेंस भी प्राप्त करे। केंद्र आवंटन के बाद 15 दिन में दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित वेंडर पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

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