निमिषा की मौत की सजा रद्द होने की खबर फर्जी
- विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने भारतीय ग्रैंड मुफ्ती का दावा खारिज किया
नई दिल्ली। यमन की जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा रद्द होने की खबर फेक है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने निमिषा की सजा रद्द होने की जानकारियों को भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि ये जानकारियां मौजूदा स्थिति को सही ढंग से नहीं दर्शातीं। इससे पहले भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के ऑफिस ने दावा किया था कि निमिषा प्रिया की पहले स्थगित की गई मौत की सजा को अब रद्द कर दिया गया है। निमिषा प्रिया यमन में एक हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रही हैं। निमिषा प्रिया (37) को जून 2018 में एक यमनी नागरिक की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। उन्हें 16 जुलाई को मौत की सजा दी जानी थी। हालांकि, इससे पहले ही 15 जुलाई को निमिषा की सजा अस्थाई रूप से टाल दी गई थी।
भारत और यमन के धर्मगुरुओं ने बातचीत की थी
भारतीय ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार और यमन के चर्चित सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज ने 15 जुलाई को इस मसले पर बातचीत की थी। इसमें यमन के सुप्रीम कोर्ट के एक जज और मृतक का भाई भी शामिल था। यमन के शेख हबीब को बातचीत के लिए मुफ्ती मुसलियार ने मनाया था। यह भी पहली बार था कि जब मृतक के परिवार का कोई करीबी सदस्य बातचीत को तैयार हुआ हो। यह बातचीत शरिया कानून के तहत हुई थी। यह मृतक के परिवार को दोषी को बिना किसी शर्त के या फिर ब्लड मनी के बदले माफ करने का कानूनी अधिकार देता है।

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