जीवित किसानों को कागजों पर 'मुर्दा' बना रही महिला तहसीलदार; BJP उपाध्यक्ष ने अपनी ही सरकार को घेरा- 'कराहल में मची है खुली डकैती'
श्योपुर, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसका एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। सूबे के सीमावर्ती आदिवासी बाहुल्य जिले श्योपुर की कराहल तहसील में पदस्थ महिला तहसीलदार रोशनी शेख पर गरीबों और आदिवासियों के हक का पैसा डकारने के गंभीर आरोप लगे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह आरोप किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि खुद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने सरेआम ऑन-कैमरा लगाए हैं। 'सबकी खबर' में बीजेपी नेता ने प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलते हुए सीधे मुख्यमंत्री और कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल दाग दिए हैं।
भ्रष्टाचार का खुला तांडव
बीजेपी जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह का आरोप है कि कराहल तहसील में तहसीलदार रोशनी शेख ने भ्रष्टाचार का खुला तांडव मचा रखा है। तहसीलदार अपनी सरकारी आईडी का दुरुपयोग कर जीवित किसानों को कागजों पर मृत घोषित कर रही हैं और उनके मुआवजे की राशि दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर खुद हजम कर जा रही हैं। लगभग आधा सैकड़ा (50) गरीब और आदिवासी किसान इस लूट का शिकार हुए हैं। संपन्न लोगों को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन जब बात शोषित-वंचित आदिवासियों की आती है, तो पटवारियों के माध्यम से उनसे मोटे कमीशन की मांग की जा रही है। करीब 8 से 10 लाख रुपये के मुआवजे की हेराफेरी का यह खेल सीधे तौर पर सरकारी डकैती है। कराहल का यह मामला श्योपुर जिले की ही एक पुरानी दागी तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की याद दिलाता है। अमिता सिंह तोमर वही तहसीलदार हैं जिन्होंने कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में लाखों रुपये जीते थे, लेकिन बाद में किसानों के बाढ़ मुआवजे की राशि डकारने के जुर्म में उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी थी। बीजेपी उपाध्यक्ष का कहना है कि अमिता सिंह तोमर के जेल जाने के बाद लगा था कि व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन तहसीलदार रोशनी शेख ने भ्रष्टाचार के उस कलंक को दोबारा जिंदा कर दिया है।
क्या प्रशासन की संवेदनाएं पूरी तरह मर चुकी हैं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा तमाचा खुद सरकार और जिला प्रशासन के मुंह पर है। बीजेपी जिला उपाध्यक्ष लगातार सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं, संगठन के बड़े नेताओं को बता रहे हैं, और मुख्यमंत्री तक को इस डकैती की सूचना दे चुके हैं, लेकिन भ्रष्ट अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जब जिला मुख्यालय से जांच टीम आती है, तो छोटे कर्मचारियों यानी पटवारियों को हटाकर मामले पर पर्दा डाल दिया जाता है, जबकि मुख्य आरोपी तहसीलदार अपनी कुर्सी पर बरकरार है। बीजेपी नेता ने खुलेआम सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर किसानों के हित की बात की जाती है, तो श्योपुर की कलेक्टर मैडम इन भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहीं? क्या प्रशासन की संवेदनाएं पूरी तरह मर चुकी हैं?
अब आगे क्या...
एक तरफ केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार आदिवासियों और अंतिम पंक्ति के लोगों के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि खुद सत्ताधारी दल के जिला उपाध्यक्ष को अपनी ही सरकार में एक भ्रष्ट तहसीलदार के खिलाफ मीडिया के सामने आकर गिड़गिड़ाना पड़ रहा है। बीजेपी उपाध्यक्ष ने हालांकि भरोसा जताया है कि वे इस मुद्दे को क्षेत्रीय पूर्व विधायक रामनिवास रावत के सामने उठाएंगे और अपनी संवेदनशील सरकार से इस भ्रष्ट अफसर को जेल भिजवाकर ही दम लेंगे। अब देखना यह है कि अपनी ही पार्टी के पदाधिकारी द्वारा ऑन-कैमरा सबूतों के साथ किए गए इस बड़े खुलासे के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव का हंटर इस भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र पर चलता है या फिर आदिवासियों की गाढ़ी कमाई यूं ही सरकारी तिजोरियों से निकलकर अफसरों की जेबों में जाती रहेगी।

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