इंदौर।
सियासत में 24 घंटे का वक्त कितना बड़ा होता है, इसकी बानगी इंदौर भाजपा में देखने को मिली है। शहर में पानी के गंभीर मुद्दे पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया के सुर महज 24 घंटे के भीतर पूरी तरह बदल गए। कल तक जो विधायक जी महापौर पर अपनी विधानसभा के साथ सौतेला व्यवहार करने और पानी की टंकियों को लेकर भेदभाव का संगीन आरोप लगा रहे थे, वे अचानक महापौर के बंगले पहुंचे, उनसे गले मिले और फिर जल व्यवस्था को लेकर महापौर की तारीफों के कसीदे पढ़ने लगे।
बंद कमरे मेंं  दूर हुए गिले शिकवे
दरअसल, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-5 के भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया ने आरोप लगाया था कि उनके क्षेत्र के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है। इस अंदरूनी कलह से शहर की जनता के बीच पार्टी की जमकर किरकिरी हो रही थी। डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा को बीच-बचाव करने उतरना पड़ा। बुधवार को वे विधायक हार्डिया को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के निवास पहुंचे, जहां बंद कमरे में 'गिले-शिकवे' दूर करने की स्क्रिप्ट लिखी गई। इसके बाद बाहर आते ही नेताओं के तेवर ढीले पड़ गए और कल तक की तल्खी भाईचारे में बदल गई।
नेताओं के गले मिलने से क्या इंदौर की जनता की प्यास बुझ जाएगी?
खरी बात ये है कि भाजपा नेताओं ने अपनी आपसी खटपट को दबाकर पार्टी की साख तो बचा ली, लेकिन सवाल अब भी वही खड़ा है कि नेताओं के गले मिलने से क्या इंदौर की जनता की प्यास बुझ जाएगी? क्या महज 24 घंटे में अपनी ही सरकार के महापौर के खिलाफ यू-टर्न लेने वाले विधायक जी के इस समझौते से जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए लग रही कतारों से मुक्ति मिल जाएगी? नेताओं के सुर तो बदल गए, लेकिन जमीन पर पानी की किल्लत की हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।