• बिल पास होने के बाद कब्जाधारियों पर कसेगा शिकंजा

  • व्यापारी बोले- हमारी रोजी-रोटी का क्या होगा

लखनऊ। लखनऊ में वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। दावा है कि लखनऊ में करीब 4,000 संपत्ति वक्फ बोर्ड की है, जिनमें राजभवन, डीएम कार्यालय और रेलवे स्टेशन जैसी प्रमुख जगहें शामिल है। बांकी संपत्ति पर दशकों से निजी कब्जा है। कई जगह व्यवसायिक निर्माण हो चुका है। अब सरकार कब्जाधारियों पर कानूनी सख्ती करने जा रही है।

शहर की कई वक्फ संपत्तियों पर दशकों से कब्जे हैं। कई जगह दुकानें चल रही हैं, तो कहीं अवैध निर्माण हो चुका है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, वक्फ की संपत्ति में मस्जिदें, कब्रिस्तान, इमामबाड़े, मदरसे, दरगाहें और व्यवसायिक इमारतें हैं।

उत्तर प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने कहा- ज्यादातर प्रॉपर्टी के राजस्व से जुड़े अभिलेख (कागज) कब्जेदारों के पास नही हैं। कई संपत्तियां ऐसी हैं, जिनका कब्जा भी नहीं है।

 

कब्जेदार बोले- हमारी रोजी-रोटी का क्या होगा

फोटो न छापने की शर्त पर कब्जेदारों ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उनका कहना है- अगर हम वीडियो में बात करेंगे तो हम चिह्नित कर लिया जाएगा। लेकिन यहां रहते हुए हमारी कई पीढ़ी बीत गई। अब हमें बेदखल कैसे किया जा सकता है?

चौक में रहने वाले कब्जेदार राशिद हुसैन ने कहा-​​ हमारी दुकान दादा के समय से है। हम वक्फ बोर्ड को किराया भी देते हैं, लेकिन अब कहा जा रहा है कि दुकान हटेगी। हमारी रोजी-रोटी का क्या होगा?

वक्फ की ज्यादातर संपत्ति पर नेताओं के कब्जे

उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मोहसिन रजा ने कहा- मोदी सरकार इस संशोधन के जरिए करोड़ों मुसलमानों के उत्थान के लिए काम करने जा रही है। इस बिल के आने से मुस्लिम समाज के बच्चे पढ़-लिख सकेंगे। दबे-कुचले और पिछड़े मुसलमानों का भला होगा। इलाज और विकास के रास्ते खुलेंगे। मोहसिन रजा ने यह भी कहा कि ज्यादातर वक्फ की संपत्तियों के राजस्व से जुड़े अभिलेख (कागज) वक्फ बोर्ड के पास नहीं है। कई संपत्तियों का कब्जा भी बोर्ड के पास नहीं है।