अशोकनगर/सागर,सबकी खबर। 
दिगंबर जैन समाज के शीर्ष संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगत पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के खिलाफ पिछले लंबे समय से सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक और अनर्गल टिप्पणियां करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने गोपनीय तरीके से सागर में दबिश देकर तीन आरोपियों को दबोच लिया है। इस पूरे मामले में जो प्रारंभिक खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक है। जैन संत के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए जैन समाज के ही एक तथाकथित रसूखदार 'मास्टरमाइंड' ने अपने मुस्लिम कर्मचारियों के मोबाइल सिम का इस्तेमाल कर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया।
रात के अंधेरे में 'अरहम' बनकर ग्रुपों में फैलाते थे गंदगी
पिछले काफी समय से व्हाट्सएप (WhatsApp) के कई जैन ग्रुपों में रात के 2-2 बजे मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज को लेकर बेहद अभद्र और बेबुनियाद बातें पोस्ट की जा रही थीं। इन नंबरों पर जब कोई फोन करता था, तो वे बंद आते थे। इनमें से एक मुख्य मोबाइल नंबर 7354297110 था, जिसने अपना नाम 'अरहम' रख रखा था और जैन बनकर समाज के ग्रुपों में सेंध लगाई थी। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो अशोकनगर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश काशल ने कोतवाली थाने में मोर्चा संभाला और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299, 352 और 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया। गौर करने वाली बात है कि धारा 299 (जो पहले आईपीसी की धारा 295A हुआ करती थी) धार्मिक भावनाएं भड़काने और दो वर्गों को आपस में लड़ाने के खिलाफ बेहद सख्त गैर-जमानती धारा है, जिसमें सीधे जेल का प्रावधान है।
सागर से उठाए गए तीन आरोपी, 'रोड लाइंस' वाले बड़े नाम तक पहुंची आंच
अशोकनगर पुलिस ने साइबर सेल की मदद से जब नंबरों को ट्रेस किया, तो इसकी लोकेशन सागर की एक बस्ती में मिली। पुलिस ने वहां धावा बोलकर तीन संदिग्धों को उठाया, जिनमें दो मुस्लिम और एक हिंदू लड़का शामिल बताया जा रहा है। जब पुलिस ने इनसे कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने जैन समाज के ही एक बड़े नाम का खुलासा कर दिया। आरोपियों ने सागर के 'रोड लाइंस' वाले राजेश जैन का नाम लिया है, जो सागर में बन रहे एक बड़े जैन तीर्थ के निर्माण संयोजक भी बताए जाते हैं। इसके बाद मकरोनिया पुलिस ने रात में ही राजेश जैन को उठाकर पूछताछ की। हालांकि, उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है, लेकिन अशोकनगर पुलिस ने उन्हें आज सुबह 11 बजे बयान दर्ज कराने के लिए समन जारी किया था। चर्चा है कि वे कानूनी सलाह ले रहे हैं और मेडिकल भेजकर समय मांग सकते हैं।
आखिर मुनि श्री सुधा सागर जी से क्यों है चिढ़?
वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन ने अपनी रिपोर्ट में तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कुछ लोगों को मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज से इतनी चिढ़ क्यों है? वजह साफ है— पिछले 3-4 सालों में महाराज जी का प्रभाव और ग्राफ ऊपर गया है।  वे जहां जाते हैं, वहां लाखों की भारी भीड़ उमड़ती है।  वे अब तक 210 से ज्यादा प्राचीन जीर्ण-शीर्ण जैन तीर्थों का कायाकल्प और नव-निर्माण करा चुके हैं। उन्होंने जयपुर के सांगानेर में जैन विद्वानों को तैयार करने के लिए विशाल संस्थान खोला है। समाज को एकजुट करने के लिए उन्होंने 'जिन शासन एकता संघ' जैसा मजबूत संगठन खड़ा किया है, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सब जुड़े हैं। यही अचूक संगठन क्षमता और महाराज जी के प्रति अटूट जन-विश्वास कुछ षड्यंत्रकारियों की आंखों में खटक रहा है। सामने आकर बात करने की हिम्मत न होने के कारण ये लोग छुपकर पीठ पीछे वार कर रहे थे।
बेनकाब होगा सिंडिकेट!
यह बेहद घिनौना खेल है कि आप खुद जैन होकर, अपने संतों के खिलाफ जहर उगलने के लिए अपने ही गरीब कर्मचारियों की सिम कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं ताकि पकड़े जाने पर नाम उनका आए। शुरुआती जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि जिन मुस्लिम बच्चों के नाम पर सिम थी, वे मोहरा थे और असली दिमाग पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड का था। अशोकनगर पुलिस इस मामले में बेहद मुस्तैद है। आरोपियों पर लगी धारा 299 उन्हें जेल की हवा खिलाने के लिए काफी है। आने वाले 3 से 4 दिनों के भीतर इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई और रसूखदारों की गिरफ्तारियां होना तय माना जा रहा है।