यूपी के एक IAS अधिकारी अनुराग यादव ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लताड़ दिया!
नई दिल्ली।
मुख्य चुनाव आयुक्त की बात पर IAS अनुराग यादव ने सख्त ऐतराज जाहिर कर दिया और कहा कि आप हमसे इस तरह से बात नहीं कर सकते। अपने अनुभव का हवाला देते हुए अनुराग यादव ने कहा कि हमने भी इस सेवा में 25 साल गुजारे हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर बुधवार को एक रिव्यू मीटिंग थी। यह मीटिंग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ले रहे थे और इस दौरान उनकी यूपी के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव से तीखी बहस हो गई। मामला यह था कि अनुराग यादव बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। वर्चुअल मीटिंग के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सभी अधिकारियों से बारी-बारी से पूछ रहे थे कि उनके यहां कितने पोलिंग बूथ आदि हैं। इसी दौरान जब अनुराग यादव की बारी आई तो उन्हें जवाब देने में थोड़ी देरी हुई। इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोई टिप्पणी कर दी। इस पर IAS अनुराग यादव ने सख्त ऐतराज जाहिर कर दिया और कहा कि आप हमसे इस तरह से बात नहीं कर सकते। अपने अनुभव का हवाला देते हुए अनुराग यादव ने कहा कि हमने भी इस सेवा में 25 साल गुजारे हैं। आप हमसे इस तरह से बात नहीं कर सकते। अनुराग यादव के इस तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाब दिए जाने के बाद कुछ देर के लिए बैठक में सन्नाटा छा गया। फिर दूसरे विषयों को लेकर बात शुरू की गई और किसी तरह बैठक को निपटाया गया। अब जानकारी मिली है कि अनुराग यादव को पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया गया है। हालांकि चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें बहस के कारण नहीं हटाया गया है बल्कि कार्य में अक्षम होने के चलते इस जिम्मेदारी को वापस लिया गया है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूछा था कि आपके क्षेत्र में कितने पोलिंग बूथ हैं। यह एक बेहद बेसिक सवाल था, जिसका जवाब वह नहीं दे पा रहे थे। उनकी ओर से काफी देर में जवाब दिया गया। इसी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने टिप्पणी कर दी थी और फिर आईएएस उनसे ही भिड़ गए। अनुराग यादव ने कहा कि हमारा भी इस सर्विस में एक लंबा अनुभव है। आप हमसे इस तरह बात नहीं कर सकते।
यूपी में किस पद पर है अनुराग यादव की तैनाती?
बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले ही अनुराग यादव को उत्तर प्रदेश में सोशल वेलफेयर एवं सैनिक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वह यूपी सरकार में प्रधान सचिव स्तर के आईएएस हैं। इससे पहले वह आईटी विभाग में तैनात रहे थे। सूत्रों का कहना है कि पर्यवेक्षक की भूमिका बेहद अहम होती है। चुनाव आयोग के आंख और कान ये अधिकारी माने जाते हैं। ऐसे में यदि उनके स्तर से ही किसी जानकारी में देरी होती है तो यह चिंता वाली बात है। एक अधिकारी ने कहा कि यदि कोई सीनियर ऑफिसर कई दिन क्षेत्र में बिताने के बाद भी यह नहीं बता पाए कि वहां कितने बूथ हैं तो फिर यह चिंता वाली बात है।

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