एपस्टीन फाइल्स विवाद: सुधांशु त्रिवेदी के 'गांधी' वाले बयान पर मचा घमासान, पूर्व आईआरएस अधिकारी ने बताया 'मानसिक दिवालिया'
नई दिल्ली/भोपाल।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों 'एपस्टीन फाइल्स' (Epstein Files) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। लेकिन भारत में यह मामला तब और गरमा गया जब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक टीवी डिबेट के दौरान इस विवादित फाइल में महात्मा गांधी का नाम होने का दावा कर दिया। उनके इस बयान के बाद अब चौतरफा विरोध शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक टीवी डिबेट के दौरान, जब कांग्रेस समर्थकों ने एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम घसीटने की कोशिश की, तो पलटवार करते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा: एपस्टीन फाइल में यदि आठ बार नरेंद्र मोदी का नाम है, तो चार बार राहुल गांधी, सोनिया गांधी और यहां तक कि महात्मा गांधी और पोप जॉन पॉल द्वितीय का भी नाम है।"
पूर्व इनकम टैक्स कमिश्नर का तीखा हमला
सुधांशु त्रिवेदी के इस बयान पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रिंसिपल चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर आर.के. पालीवाल ने फेसबुक पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अपनी ईमानदारी के लिए चर्चित रहे पूर्व IRS अधिकारी पालीवाल ने त्रिवेदी की बौद्धिक क्षमता पर सवाल उठाते हुए उन्हें 'मूर्ख' और 'मानसिक रूप से दिवालिया' तक कह डाला।
पालीवाल के फेसबुक पोस्ट के मुख्य अंश:
तथ्यों की भूल: उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद जेफ्री एफस्टीन का जन्म हुआ था। ऐसे में गांधी जी का नाम उस फाइल में होना नामुमकिन और हास्यास्पद है। नफरत की राजनीति: पालीवाल ने लिखा कि भाजपा प्रवक्ता झूठ बोलने में 'पीएचडी' कर चुके हैं और गांधी जी के प्रति उनकी नफरत आज भी कम नहीं हुई है। कड़ी चेतावनी: उन्होंने त्रिवेदी को संबोधित करते हुए कहा कि "गांधी वह सूर्य हैं, जिन पर थूकने की कोशिश करोगे तो तुम्हारा अपना चेहरा ही गंदा होगा।"
राजनीतिक गलियारों में हलचल
वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, सुधांशु त्रिवेदी के इस दावे को उनकी छवि के विपरीत माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा उन्हें एक अत्यंत विद्वान और ज्ञानवान नेता के रूप में पेश करती रही है। आलोचकों का कहना है कि डिबेट में बढ़त बनाने के चक्कर में उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। फिलहाल, इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद अभी तक सुधांशु त्रिवेदी या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई स्पष्टीकरण या सफाई सामने नहीं आई है। गांधीवादियों और विपक्षी दलों का कहना है कि यह देश की महान विभूतियों के अपमान का एक नया तरीका है।

