भोपाल में कार्यक्रम के दौरान नाराज़ दिखे डॉ. मोहन यादव, आयोजकों को दी नसीहत
भोपाल।
राजधानी भोपाल में आयोजित नेशनल रिसर्चर मीट के उद्घाटन सत्र में उस समय हल्का सा असहज माहौल बन गया, जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधन के लिए सबसे आखिर में आमंत्रित किया गया। करीब दो घंटे तक चले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पूरे समय मंच पर मौजूद रहे और अंत में उन्हें बोलने का अवसर दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन संघ की सहयोगी संस्था दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंच से संयमित लेकिन स्पष्ट शब्दों में अपनी नाराज़गी जाहिर की।
‘मुख्यमंत्री को कहां रखना चाहिए, यह तय होना चाहिए’
मुख्यमंत्री ने कहा, “मुख्यमंत्री के नाते से मेरा अंत में इस विषय पर बोलना, प्रशासनिक दृष्टि से मेरा ध्यान गया कि किसने बनाया कार्यक्रम कि आखिरी में मुझे बुला रहे, इतने अच्छे वक्तव्यों के बाद। अपनी त्रुटि मान लें कि इन सारे विषयों को रखने के लिए मुख्यमंत्री को कहां रखना चाहिए।” उन्होंने आगे हल्के अंदाज में कहा कि यह शोध संस्थान है, इसलिए प्रयोग करने की छूट भी है। साथ ही आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भविष्य में ऐसी त्रुटि न दोहराने की सलाह दी।
‘अगली बार नंबर पहला रख दीजिएगा’
अपने लगभग साढ़े छह मिनट के संक्षिप्त संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा, “उद्घाटन सत्र में आपने सुयोग्य अतिथियों को बुलाया, लेकिन मुझे माफ करना, अगली बार नंबर पहला रख दीजिएगा। बहुत-बहुत धन्यवाद।”
मुख्यमंत्री ने सहज और मुस्कराते हुए अंदाज में बात रखी, लेकिन उनके संदेश को समझने वाले भली-भांति समझ गए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके वक्तव्य को गंभीर संकेत के रूप में लिया।

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