सीएम बोले;हमारी पीएचडी हमें ही समझ नहीं आती:नेशनल रिसर्चर मीट के आखिरी में भाषण के लिए बुलाया तो आयोजकों को दी नसीहत
भोपाल।
राजधानी में आयोजित 'नेशनल रिसर्चर मीट' के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक अलग ही अंदाज में नजर आए। दत्तोपंत ठेंगडी शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री और राजनेताओं के प्रति सामाजिक नजरिए पर जमकर चुटकी ली। सीएम ने कहा कि आज के दौर में हमने शोध को इतना क्लिष्ट (कठिन) कर दिया है कि वह 'बलिष्ठ' होकर हम पर ही हावी हो गया है।
"राजनेता और पीएचडी... यह तो डबल आफत है"
मुख्यमंत्री ने अपनी शोध यात्रा के संघर्ष को साझा करते हुए कहा, "कई बार हमारी पीएचडी हमें ही मालूम नहीं पड़ती कि वो काहे के लिए है। यह और भी दिक्कत तब कर देती है जब कोई राजनेता पीएचडी करे। समाज में यह संकट जुड़ा है कि यदि राजनेता पीएचडी है, तो वह यह (नकल या शोध) कर ही नहीं सकता। राजनेता के साथ तो यह 'डबल आफत' है।"
किस्सा: "नकल नहीं करनी थी, इसलिए भाजपा को ही चुन लिया"
अपनी पीएचडी के विषय चयन पर मुख्यमंत्री ने ठहाका लगाते हुए कहा- राजनेता के साथ संकट जुड़ जाता है कि यदि राजनेता पीएचडी है तो ये बिलकुल कर ही नहीं सकता। ये संकट मेरे साथ भी था। "जब मैं पॉलिटिकल साइंस से पीएचडी करने गया तो सबसे बड़ी चुनौती टॉपिक की थी। मैंने साफ कह दिया था कि भाई, मैंने जिंदगी में कभी नकल नहीं की है। फिर तीन दिन विचार करने के बाद रास्ता निकाला कि भाजपा और उसकी पूर्ववर्ती सरकारों पर ही शोध कर लूं। फायदा यह हुआ कि इसे कोई नींद में भी पूछेगा तो बता दूंगा। संवित सरकार, जनता पार्टी और पटवा जी की सरकार की विशेषताएं बताईं और हो गई पीएचडी पूरी। हमारा भी काम चल गया।"

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