भोपाल। 
शहर की प्यास बुझाने का दावा करने वाला नगर निगम खुद अपने ही पानी पर भरोसा करता नजर नहीं आ रहा है। राजधानी की लाखों आबादी को पेयजल सप्लाई करने वाला निगम प्रशासन अपने मुख्यालय और अन्य कार्यालयों में पीने के लिए निजी वेंडर से बोतलबंद पानी मंगवा रहा है। इसके लिए हर महीने 40 से 45 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने ओम साईराम वाटर सप्लायर से अनुबंध किया है। हर माह करीब 1200 से 1500 पानी के कैंपर (प्रत्येक लगभग 20 लीटर) मंगाए जाते हैं। यह व्यवस्था उस समय सवालों के घेरे में आ गई जब निगम का जल कार्य विभाग शहर को सप्लाई होने वाले पानी को पूरी तरह शुद्ध और मानकों के अनुरूप बताता है। यदि निगम का पानी पूरी तरह सुरक्षित है तो फिर अधिकारी-कर्मचारी निजी बोतलबंद पानी पर निर्भर क्यों हैं? यह सवाल शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा का कहना है कि शहर में शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। उनके अनुसार, निगम के कार्यक्रमों और कार्यालयों में जरूरत के चलते निजी वेंडर से पानी मंगाया जाता है। हालांकि, हाल में किसी बड़े कार्यक्रम के बिना भी मुख्यालय में कैंपर रखे देखे गए, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं। एक ओर निगम जनता को नल का जल पीने योग्य बता रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद पैकेज्ड पानी पर खर्च कर रहा है। ऐसे में निगम की कार्यप्रणाली और जल गुणवत्ता के दावों पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।