अशोकनगर।
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले से भ्रष्टाचार के आरोपों का एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां मत्स्य विभाग के कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक शख्स हाथ जोड़कर मत्स्य निरीक्षक के सामने खड़ा हो गया और भारी सभा में अपनी दी हुई रिश्वत वापस मांगने लगा। पीड़ित का आरोप है कि काम कराने के नाम पर उससे 50 हजार रुपए लिए गए थे, लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी न काम हुआ और न ही पैसे वापस मिले।
'न योजना मिली, न पैसे बचे'
शहर के कटरा मोहल्ला निवासी मोहम्मद रफीक ने मत्स्य निरीक्षक संजय नामदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि करीब 2 साल पहले विभाग के लोग उनके पास आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 'फिश कियोस्क' (मछली दुकान) खुलवाने और साढ़े चार लाख रुपये की सरकारी मदद दिलाने का झांसा दिया। पीड़ित के अनुसार, अधिकारियों ने शर्त रखी थी कि योजना की राशि आधी-आधी बांटी जाएगी। इसी सौदेबाजी के तहत मोहम्मद रफीक ने 50 हजार रुपए एडवांस के तौर पर निरीक्षक को दिए थे। अब थक-हारकर पीड़ित ने भरे ऑफिस में हंगामा किया और रोते हुए कहा, 'मुझे ऐसी भीख नहीं चाहिए, मैं चक्कर काट-काट कर परेशान हो गया हूं, मेरे पैसे लौटा दो।
कुर्सी पर आंखें मूंदकर बैठे रहे अधिकारी
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने इस घटनाक्रम के दौरान एक अजीब नजारा देखने को मिला। जब आवेदक हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहा था और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा था, तब आरोपी मत्स्य निरीक्षक संजय नामदार अपनी कुर्सी पर आंखें बंद किए शांत बैठे रहे। उन्होंने न तो कोई कड़ा विरोध किया और न ही वहां से उठे।
विभाग में आया 142.70लाख का बजट 36 लोगों को मिला लाभ
मामले के तूल पकड़ने पर मत्स्य निरीक्षक संजय नामदार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि योजना का लाभ केवल पात्र हितग्राहियों को दिया जाता है। इस वर्ष 142.70 लाख रुपए का बजट आया था, जिससे 36 लोगों को लाभान्वित किया गया है। जो लोग योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाते हैं, वे अक्सर इसी तरह के झूठे आरोप लगाते हैं। भले ही अधिकारी इन आरोपों को नकार रहे हों, लेकिन दफ्तर के अंदर एक आम नागरिक का इस तरह गिड़गिड़ाना जिले के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।