आपराधिक शिकायत करना मानहानि नहीं, जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल कोर्ट का आदेश किया रद्द
जबलपुर।
मानहानि से जुड़े एक मामले में एमपी हाईकोर्ट ने अहम फैसला दिया है। फैसले में कहा है कि किसी भी कानूनी अधिकार के तहत किसी सक्षम अधिकारी के सामने की गई आपराधिक शिकायत को मानहानि नहीं माना जा सकता। यह बात धारा 499 के अपवाद 8 के तहत आती है। इसी आधार पर, जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल की जिला अदालत में चल रही एक मानहानि की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। यह मामला एक तलाकशुदा पत्नी द्वारा अपने पूर्व पति के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा था।
तलाकशुदा पत्नी ने किया था केस
दरअसल, भोपाल के सैयद राशिद अली की तलाकशुदा पत्नी ने उन पर मानहानि का केस किया था। अली की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनकी पत्नी ने शादी के बाद झगड़ा होने पर उनके खिलाफ धारा 498A के तहत केस दर्ज करवाया था, जिसमें उन्हें एक साल की सजा हुई थी। हालांकि, बाद में अपीलीय अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की थी, जो अभी लंबित है।
भोपाल कोर्ट ने पत्नी को किया था बरी
शिकायतकर्ता पत्नी का कहना था कि धारा 498A के तहत केस दर्ज होने के बाद अली ने मुस्लिम कानून के तहत तलाक-ए-बैन दे दिया था। इसके बाद अली ने पत्नी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 477, 494 और 149 के तहत एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में भोपाल की अदालत ने 14 अक्टूबर 2023 को पत्नी और अन्य को बरी कर दिया था।
पत्नी ने दर्ज कराया मानहानि का केस
इसके जवाब में, तलाकशुदा पत्नी ने अली के खिलाफ धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दायर किया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अली ने झूठे आरोप लगाकर उनके और रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की, जिससे उन्हें मानसिक तकलीफ हुई और समाज में बदनामी हुई। साथ ही, यह भी आरोप था कि अली उन पर लंबित आपराधिक प्रकरण वापस लेने का दबाव बना रहे थे। पत्नी और उसके पिता के बयानों के आधार पर भोपाल जिला न्यायालय के जेएफएमसी ने अली के खिलाफ धारा 500 के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था, जिसमें सजा का प्रावधान है।
याचिकाकर्ता ने रखे अपने तर्क
याचिकाकर्ता अली की तरफ से यह तर्क दिया गया कि उन्होंने जो आपराधिक शिकायत की थी, वह एक कानूनी अधिकार के तहत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष की थी। धारा 499 के सेक्शन 8 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अच्छी नीयत से और कानूनी अधिकार के तहत किसी आपराधिक शिकायत में आरोप लगाता है, तो यह मानहानि नहीं मानी जाती। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस तर्क को मानते हुए कहा कि यह मामला धारा 499 के सेक्शन 8 के तहत आता है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता है। इसी वजह से, भोपाल की अदालत में अली के खिलाफ धारा 500 के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया है।

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