मध्य प्रदेश में AI से लैस रहेंगी सरकारी बसें, निजी बसों के महंगे किराए से मिलेगी मुक्ति
भोपाल।
मध्य प्रदेश राज्य परिवहन सेवा बंद होने के 22 साल बाद एक बार फिर प्रदेश में सरकारी बस परिवहन सेवा शुरू करने की तैयारी हो रही है. इसके लिए में राज्य स्तरीय कंपनी मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का गठन किया जा चुका है. वहीं कंपनी ने मध्य प्रदेश के सभी मार्गों का सर्वे भी पूरा कर लिया है. प्रदेश में राज्य स्तरीय कंपनी के साथ 7 सहायक कंपनियां भी गठित की गई हैं, जो संभागीय स्तर पर बसों के परिवहन की मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी संभालेंगी.
बसों की संख्या का किया जा रहा आकलन
मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने बताया कि मध्य प्रदेश के अधिकतर मार्गों का सर्वे पूरा हो गया है. यहां कितनी बसें चलेंगी, इसका आकलन किया जा रहा है. सबसे पहले इंदौर और उज्जैन संभाग में बस का संचालन किया जाएगा. इसके लिए सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. 6 बिंदुओं में संस्थागत व्यवस्था, स्टाफ, नियम, कर संशोधन, रूट सर्वे व आइटी प्लेटफार्म, एजेंसी चयन, अधोसंरचना की योजना और निजी बस ऑपरेटरों से चर्चा पर काम कर रहे हैं.
7 सहायक कंपनियों का भी किया गया गठन
मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी का गठन 'रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट' में 3 जुलाई 2025 को पंजीयन के साथ हो गया है. इस राज्य स्तरीय कंपनी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे. जबकि परिवहन मंत्री एवं मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होंगे. राज्य स्तरीय कंपनी के अधीन राज्य शासन के द्वारा लिए गए निर्णयों के अनुसार 7 सहायक कंपनी सम्पूर्ण प्रदेश में रहेंगी. वर्तमान में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा और ग्वालियर में कार्य कर रही सिटी बस कंपनी के शेयर होल्डिंग में परिवर्तन करते हुए इन सातों शहरों की नवगठित कंपनियां बनाई गई हैं.
सबसे पहले इन 7 शहरों का चयन
बता दें कि प्रदेश में पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बसें चलाने से पहले मार्गों का सर्वे किया जा रहा है. सरकारी बसें केवल उन्हीं मार्गों पर चलाई जाएंगी, जिन मार्गों पर निजी बसें कम चल रही हैं. इसके साथ ही यात्रियों के लोड का सर्वे भी किया जा रहा है. सबसे पहले जिन शहरों में बस चलाने का निर्णय लिया गया है उनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा और सागर जिले शामिल हैं. इन मार्गों पर यात्रियों के दबाव और निजी परिवहन सेवाओं के खस्ताहाल होने के कारण सबसे पहले इन 7 जिलों का चयन किया गया है.
मुख्यमंत्री भी दे चुके ये निर्देश
मध्य प्रदेश में सरकारी बस परिवहन सेवा शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उत्साहित हैं. उन्होंने इसको लेकर बीते दिनों एक बैठक बुलाई थी. जिसमें प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने प्रेजेंटेशन दिया था. इसमें परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन भी शामिल थे. इस बैठक में सीएम ने निर्देश दिया था कि इन बसों में शहर व गांवों के नाम विंड शील्ड पर साफ दिखें. वहीं जिन संभागों में रूटों तय हो गए, वहां जल्दी बसें उतारने के निर्देश भी दिए हैं.
सीसीटीवी और एआई सिस्टम से लैस होंगी बसें
राज्य परिवहन निगम को घाटे की वजह से मध्य प्रदेश में बंद किया गया था. इसका बड़ा कारण बस स्टाफ द्वारा की जा रही अनियमितताएं थीं. ऐसे में इस बार सरकार बसों की एआई के जरिए निगरानी करेगी. सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे. राज्य स्तर पर होल्डिंग कंपनी और क्षेत्रीय स्तर पर गठित कंपनियों के कार्यालय में कमांड सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे इन बसों की लाइव ट्रैकिंग की जा सके. इसके साथ ही यात्रियों को हैंड हेल्ड मशीन से टिकट दिए जाएंगे. बस संचालन का जिम्मा किसी और को तो टिकट वसूली का जिम्मा अन्य कंपनी को दिया जाएगा.

भोपाल क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: 10 पेटी अवैध शराब के साथ आरोपी गिरफ्तार
भारत की ऐतिहासिक छलांग: एडवांस परमाणु रिएक्टर की बड़ी उपलब्धि, पीएम मोदी ने दी बधाई
अमेरिका ने ईरान की मदद करने वाले देशों और कंपनियों पर 50% टैरिफ लागू किया
उदय प्रताप सिंह ने किसानों को उचित मूल्य देने की प्रतिबद्धता जताई