वक्फ संशोधन बिल में देरी, सरकार ने नीतीश कुमार की मांग को किया स्वीकार
ईद के बाद लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लाया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार एनडीए घटकदल जेडीयू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहल पर ईद तक वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाएगी. नीतीश कुमार को इस बिल का असर इस अक्टूबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव पर पड़ने का डर है. वैसे जेडीयू वक्फ संशोधन बिल के पक्ष में है और नीतीश कुमार द्वारा दिए गए सभी सुझावों को संशोधित बिल में जगह भी दी गई है. हालांकि, केंद्र सरकार वक्फ संशोधन बिल में देरी के पीछे पार्लियामेंट में अन्य विधाई कामों का हवाला दे रही है.
बिहार में वक्फ बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
बिहार में बुधवार को वक्फ विधेयक के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पटना में महाधरना का आयोजन किया था. विधानसभा से लेकर सड़कों तक पर प्रदर्शन हुए. विभिन्न राजनीतिक दलों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एआईएमपीएलबी के इस विरोध का समर्थन किया था. एआईएमपीएलबी ने संसद में पेश वक्फ विधेयक को वापस लेने की मांग की और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे धर्मनिरपेक्ष नेताओं से विवादास्पद विधेयक के लिए उनके समर्थन पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया.
तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी, क्योंकि यह असंवैधानिक और तानाशाही प्रवृत्ति का है. राजद नेता ने कहा कि यह नागपुरिया विचारधारा से प्रेरित है. तेजस्वी का इशारा RSS की तरफ था, जिसका मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर में है. तेजस्वी ने सीएम नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग सत्ता के लालच के कारण विधेयक का समर्थन कर रहे हैं.
वक्फ बिल के खिलाफ किसने क्या कहा?
इस विरोध प्रदर्शन में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर जैसे राज्य के बाहर के नेता भी शामिल हुए. यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने संवाददाताओं से कहा कि वक्फ पर हमला करने के बाद मोदी सरकार अब मुसलमानों के बीच ईद किट बांट रही है. यह किसी की आंखें निकालने के बाद उसे चश्मा देने के समान है.
बिहार में माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने इस विधेयक की तुलना हिटलर द्वारा अन्य धर्मों के लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने के लिए यहूदियों को निशाना बनाए जाने से की. एआईएमआईएम की बिहार इकाई के अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया कि हमें दाढ़ी रखने और टोपी पहनने जैसी प्रथाओं के लिए पहले से ही निशाना बनाया जा रहा है. वक्फ विधेयक इसलिए लाया गया है, ताकि मृतकों को भी न बख्शा जाए और हमारे कब्रिस्तानों पर बुलडोजर चलाए जाएं.
इससे पहले विधानसभा में तिरंगा लेकर पहुंचे राजद और वामपंथी विधायकों ने वक्फ विधेयक को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर इसे स्थगित करना पड़ा. विपक्षी विधायकों ने विवादास्पद विधेयक की निंदा करने वाले नारे लिखी तख्तियां भी थाम रखी थीं.

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