भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के अपने कार्यकाल में किए गए काले कारनामों की इतनी लंबे फेहरिस्त हैं  कि एक निकालो तो सैंकड़ों बाहर आ जाती है। चिंतनीय सवाल तो यह भी है कि एकाध छोटे मोटे विभाग का प्रशासनिक अधिकारी भ्रष्ट हो तो समझ में आता हैं लेकिन मुख्य सचिव जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस व्यक्ति इतने खेल कर डाले जिसकी भनक प्रदेश के कथित मामा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तक न लग पाई हो यह थोड़ा समझ से परे हैं। हालांकि सूत्र तो यही बताते रहे हैं कि बैंस के कारनामों में शिवराज की मौन सहमति भी रहती थी और माल में एक हिस्सा भी रहता था। आज ऐसे ही एक कारनामे को लेकर एक खबर छनकर सामने आई है।  खबर पर्यटन विभाग से आई है। पर्यटन विभाग को इकबाल सिंह क​बैंस ने किस तरह से चलाया है उसका एक उदाहरण आप देख लेंगे तो चौंक जाएंगे। 2008 में यह पर्यटन विभाग में एक कॉलेज बनाया गया था जिसका नाम था मध्य प्रदेश इंस्टट्यूट ऑफ हॉस्पिटिटी ट्रैवल एंड टूरिज्म स्टडीज भोपाल। इस कॉलेज का उद्देश्य यह था कि मध्य प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में लोगों को शिक्षित करना और उन्हें रोजगार दिलाना। लेकिन इकबाल सिंह बैस की नियत इतनी खराब हुई कि 2021 में उन्होंने इस कॉलेज का जो संचालक है वह अपनी पत्नी की सहेली को बनाया। योग्यता कुछ भी नहीं है। टूरिज्म का टी भी नहीं जानती वे। लेकिन इकबाल सिंह बैस जो चाहते थे वो होता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इकबाल सिंह के सामने धृतराष्ट्र बने हुए थे। आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी। वे बोल नहीं सकते थे। वाकई में यह मध्य प्रदेश सरकार चलाई जैसी चाही वैसी चलाई अब एक-एक करके सारे पाप सामने आने लगे हैं। उनके तमाम सारे कारनामे सामने आने लगे हैं। इकबाल सिंह की पत्नी हैं। उनकी एक सहेली है जिनका नाम है  डॉ. नीलिमा वर्मा। वे गृह विभाग की प्रोफेसर है। गृह विषय की वे नूतन  कॉलेज में प्रोफेसर रही हैं। लेकिन जब वे रिटायर होने लगी 2021 में उनका 2021 अक्टूबर में रिटायरमेंट था। जब वे रिटायर होने लगी तो इकबाल सिंह बैस ने केवल 4 महीने पहले जून 2021 में उनका डेपुटेशन कर दिया जबकि चार महीने रह गए इन रिटायरमेंट में और उनका डेपुटेशन करा दिया गया टूरिज्म के इस कॉलेज में एज ए डायरेक्टर करा दिया और मात्र 4 महीने बाद वो जब रिटायर हुई हैं उसके बाद में उन्हीं को यहां संविदा पर रख लिया गया। जबकि नियम में यह है कि वहां डायरेक्टर पद के लिए जो योग्यता बनाई गई है उसे दरकिनार कर दिया गया। 65 साल उम्र है। जीवन भर उन्होंने गृह विषय को पढ़ाया है। होम साइंस को पढ़ाया है। और उन्हें बना दिया गया टूरिज्म का डायरेक्टर। अब केवल और केवल आप देखेंगे कि आप चले जाइए जरा टूरिज्म कॉलेज। इनके आने के बाद 2 साल तक इस कॉलेज में जीरो जीरो ईयर घोषित किया गया। यानी छात्र ही नहीं आए। केवल इकबाल सिंह की जिद  पत्नी की जिद  के कारण शिक्षाा के साथ खिलवाड़ भी इकबाल ने कर दिया। तमाम सारी शिकायतों में उनकी पत्नी का नाम सामने आया है। उनकी पत्नी इग्नू में वो है प्रोफेसर। इग्नू से इसको एफिलिएटेड करा लिया गया कॉलेज को और आज की तारीख में यह है कि आज भी ये डॉक्टर नीलिमा जो इनको रिटायर हुए 4 साल हो चुके हैं। आज भी ये इस कॉलेज की डायरेक्टर बनी हुई हैं। विभाग के पीएस उनका एक पत्र सबकी खबर के पास मौजूद हैं जिसमें उन्होंने लिखा है कि 85  शिकायतें आई हैं। टूरिज्म के जो संस्थान  है कॉलेज शिक्षण संस्थान उनकी 85 शिकायतें  आई हैं और इनका निराकरण करने की वह बात कह रहे हैं। वो स्वीकार कर रहे हैं कि कॉलेज  और ये संस्थान ठीक तरीके से नहीं चल रहे  हैं। जीरो जीरो ईयर घोषित किया गया है और फिर भी बैठी हुई है वो मैडम अयोग्यता के  बाद बैठी हुई है। कायदे से इस कॉलेज का  डायरेक्टर वही बन सकता है जिसने टूरिज्म  में पीएचडी किया हो। लेकिन इन्होंने किसी अन्य विषय में पीएचडी किया था। जब इन्हें संविदा नियुक्ति पर रखा जा रहा था तो उसमें धीरे से नियम बदल दिया। जहां लिखा था टूरिज्म में पीएचडी वहां लिख दिया किसी भी विषय में पीएचडी। आप सोचिए नियमों को धता बता कर किस तरह से आज भी इकबाल सिंह बैस का इकबाल इतना बुलंद है कि शिव शेखर शुक्ला की हिम्मत नहीं पड़ पा रही कि हर साल रिन्यूल होता है उसको रोक सके आप। आप लगातार क्या पूरे 70 साल तक इनको बिठा के रखेंगे? वैसे यह अगले साल 70 साल की होने वाली हैं। तो यह जिस तरह से और पूरा कॉलेज का कबाड़ा करके रखा है। इतना शानदार कॉलेज जहां से लोगों को रोजगार मिलना चाहिए था जहां लोग प्रवेश के लिए लाइन लगाते उसमें बच्चे ही नहीं आ रहे हैं। मतलब एडमिशन ही नहीं हो रहे हैं। वहां एक ऐसी डायरेक्टर मैडम को बिठा दिया जो अहंकार से भरी हुई है। उनके लिए एक प्राइवेट कार लगाई गई है। आप विश्वास करेंगे। 4 साल में 22 ड्राइवर बदलने पड़े हैं इन मैडको इससे आप इनका नेचर समझ लीजिए। जिस प्राइवेट व्यक्ति ने कार लगाई है इनके लिए, वह 22  ड्राइवर बदल चुका है इनके लिए। इस तरह का नेचर पूरा पूरा स्टाफ परेशान है। काम हो नहीं पा रहा है। मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग के पीएस परेशान है इनसे। वह खुद लिख रहे हैं कि आपकी 85 शिकायतें आ चुकी हैं। अरे जब 85 शिकायतें आ गई हैं तो क्यों नहीं हटाते आप इन्हें? अब तो बरकतुल्ला विश्वविद्यालय ने भी इन्हें एक चिट्ठी लिखी है कि आप अपने यहां प्रिंसिपल और स्टाफ की नियुक्ति करिए। वरना आपकी मान्यता हम रद्द कर देंगे। और इसके बाद इन्होंने स्टाफ के लिए पद की तो विज्ञापन निकाल दिए। पर प्रिंसिपल का विज्ञापन नहीं निकाल पा रही है मैडम। क्यों नहीं निकाल रही निकाल पा रही है? तो वहां सूत्रों का यह कहना है कि यदि टूरिज्म डिपार्टमेंट की विशेषज्ञता  हासिल करने वाला प्राचार्य इस संस्थान में आ गया तो यह डायरेक्टर की औकात खत्म हो  जाएगी। इनका इनका इनका जो वजूद है वो खत्म  हो जाएगा। यह सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति की कारस्तानी है। कारनामा है। वो है इकबाल सिंह का।