ग्वालियर। 
मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने अनूठे अंदाज़ के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं—कभी नाली साफ करते हैं, तो कभी खंभे पर चढ़ जाते हैं। इन दिनों मंत्री जी 'आपका सेवक-आपके द्वार' अभियान के तहत ग्वालियर की गलियों में खाक छान रहे हैं। लेकिन इस बार उनके जनसंपर्क का तरीका जनता की नींद उड़ा रहा है।
नींद से जगाकर 'फीडबैक' का फॉर्मूला
मंत्री तोमर रात के सन्नाटे में लोगों के घरों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। गहरी नींद में सोए लोग जब घबराकर दरवाजा खोलते हैं, तो सामने लाव-लश्कर के साथ ऊर्जा मंत्री खड़े मिलते हैं। मंत्री जी का सवाल सीधा होता है— "बिजली-पानी ठीक मिल रहा है न? हम लोग काम तो सही कर रहे हैं?" अचानक हुए इस 'सरप्राइज विज़िट' से लोग हैरान-परेशान हैं। जहाँ मंत्री इसे जमीनी फीडबैक बता रहे हैं, वहीं लोग इसे अपनी निजता और आराम में खलल मान रहे हैं।
लोकेशन का पता नहीं, पर 'सेवा' जारी
सोशल मीडिया पर मंत्री जी खुद अपने इस अभियान के वीडियो शेयर कर रहे हैं। ऐसे ही एक वीडियो ने उनकी काफी किरकिरी करा दी है, जिसमें वे खुद अपने समर्थकों से पूछते नज़र आ रहे हैं— "इसको कौन सा मोहल्ला बोलेंगे?" बिना भौगोलिक जानकारी के घर-घर दस्तक देने के इस अंदाज़ पर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वाकई जनसेवा है या सिर्फ कैमरों के लिए की जा रही मशक्कत?
जनता ने दिखाई जमीनी हकीकत
मंत्री जी जहाँ-जहाँ दस्तक दे रहे हैं, वहां उन्हें सिर्फ 'ऑल इज़ वेल' सुनने को नहीं मिल रहा। कई इलाकों में लोगों ने उन्हें गंदगी के ढेर, पानी की किल्लत और बिजली के झूलते तारों जैसी समस्याओं से रूबरू कराया। मंत्री ने हर जगह की तरह यहाँ भी समस्या हल करने का 'भरोसा' दिया और आगे बढ़ गए।
पब्लिसिटी स्टंट या चुनावी तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अभी चुनाव काफी दूर हैं, फिर भी मंत्री का यह 'डोर-टू-डोर' प्रेम आखिर क्या इशारा कर रहा है? आलोचकों का कहना है कि यह पब्लिसिटी स्टंट से ज्यादा और कुछ नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग चुटकी ले रहे हैं कि मंत्री जी को यह पता चले न चले कि बिजली आ रही है या नहीं, लेकिन उन्हें यह ज़रूर पता चल रहा है कि वे जनता के बीच 'कितने पानी में' हैं।