भोपाल। 
देश में जो नया उपराष्ट्रपति कौन बनेगा? नाम कई हैं। एक  दर्जन से अधिक नाम हैं। जिसमें कई  राज्यपालों के नाम हैं। कई भारतीय जनता  पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम हैं।  लेकिन मध्य प्रदेश से भी तीन नाम चल रहे  हैं। थावरचंद गहलोत का नाम चल रहा है। साथ में शिवराज सिंह चौहान का यह भी एक  चौंकाने वाला नाम है। शिवराज सिंह चौहान का नाम चल रहा है और इसके अलावा मध्य  प्रदेश के एक और नेता जो केंद्र की  राजनीति में रहे हैं। वर्तमान में मध्य  प्रदेश के विधानसभा के अध्यक्ष हैं  नरेंद्र सिंह तोमर। उनका भी नाम चल रहा  है। ये नरेंद्र मोदी और अमित शाह के जो टीम है यहां से ये क्या सोच रहे हैं ये  किसी को नहीं पता। यह जो मीडिया की अटकलें  हैं, यह है। लेकिन अगला उपराष्ट्रपति वही होगा जो संघ विचारधारा का होगा जिसकी पीढ़ियां  भारतीय जनता पार्टी और जनसंघ में रही होंगी। क्योंकि एक प्रयोग नरेंद्र मोदी अमित शाह ने किया सतपाल मलिक को लाके। दूसरा प्रयोग किया उन्होंने जगदीप धनखड़ को लाके और यह दो प्रयोग फेल होने के बाद अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी यह चाहेंगे कि बेशक उनके प्रति वफादार व्यक्ति हो लेकिन हो ऐसा जो संघनिष्ठ हो जो जनसंघ से बीजेपी तक की जिसने यात्रा की हो।  सबसे पहला थावरचंद गहलोत। कर्नाटक में राज्यपाल हैं। निश्चित  तौर पर एक अनुसूचित जाति के बड़े चेहरा  हैं। देश की भारतीय जनता पार्टी  की राजनीति के केंद्र में रह चुके हैं।  भारतीय जनता पार्टी की शीर्ष कमेटी जो है कार्य समिति के सदस्य रह चुके हैं।  जब रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाया जा  रहा था तब इनका नाम भी उस लिस्ट में था।  और इनका नाम रामनाथ कोविंद से ऊपर था।  लेकिन इनके विरोधियों ने कुछ ऐसे कागज दिल्ली तक पहुंचाए के अमित शाह और नरेंद्र मोदी थोड़े से एक कदम पीछे हट गए और वो कागज थे मीसाबंदी पेंशन को लेकर।  अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस समय बहुत परिपक्व राजनीति कर रहे हैं। वो अच्छे-अच्छे आरोपों से डरने वाले नहीं है। तो थावरचंद गहलोत को हमें गंभीरता से लेना चाहिए कि उनका नाम हो सकता है मध्य प्रदेश से क्योंकि उनके उनका नुकसान हुआ वो राष्ट्रपति नहीं बन पाए थे। दूसरा नाम शिवराज का बताया तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तो बिल्कुल चाहेंगे ही जितनी जल्दी हो शिवराज मध्य प्रदेश से विदा हो जाए क्योंकि मध्य प्रदेश में शिवराज जब तक मध्य प्रदेश रहेंगे वो किसी को भी राज तो उतने आसानी से नहीं चलाने देंगे कभी वो पद यात्रा ले निकाल लेते हैं। पिछले साल जन्माष्टमी के मौके पर जब मुख्यमंत्री जन्माष्टमी का त्यौहार मना रहे थे तो शिवराज पैरेलल मना रहे थे। कुछ नेता यहां कुछ नेता वहां दोनों जगह शकल दिखाते फिर रहे थे। ऐसे कई उदाहरण हैं। अभी पिछले दिनों उन्होंने इंदौर से एक बयान दे दिया कि मध्य प्रदेश में नकली बीज बंट रहे हैं। अब आप देश के कृषि मंत्री हो। आपको कारवाई के पूरे अधिकार है और आप बयानबाजी कर रहे हो। इस मामले को लेकर उनकी शिकातय दिल्ली तक हो गई थी। तीसरा नाम यदि नरेंद्र सिंह तोमर को केंद्र की राजनीति में रखना होता तो शायद वापस नहीं भेजते उन्हें बेहद सम्मानजनक पद पर बिठा के रखा  हुआ है। मप्र में वे स्पीकर हैं। आज भी वे  धीर गंभीर हैं।  लेकिन शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर इनका तो अनुभव बहुत लंबा है।  एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी कुछ प्रचारकों के नाम चल रहे हैं। मैंने बताया आपको कई राज्यपाल इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। हम मनोज सिन्हा की बात कर लें। वी के सक्सेना उपराज्यपाल दिल्ली के बात कर लें। ओम प्रकाश माथुर साहब जो सिक्किम के राज्यपाल हैं। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का भी नाम चल रहा है। आरिफ मोहम्मद खान  साहब जैसी भक्ति वो बीजेपी के प्रति दिखा रहे हैं। एकदम संघनिष्ठ एकदम भगवे के बगैर  घर से भी नहीं निकलते हैं। तो इस समय वह भी राज्यपाल है बिहार के। हो सकता है उनका नाम भी हो।  वसुंधरा राजे  का भी नाम चल रहा है। और एक बड़े चौंकाने वाला नाम चल रहा है। वह है जेपी नड्डा साहब का। क्योंकि नड्डा साहब पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। मंत्री पद अब उनके लिए छोटा है। बिल्कुल ऐसे कई महत्वपूर्ण नाम है। इसके अलावा भी और बहुत से नाम हैं। और जिस तरह से यह नाम चर्चा में है। मध्य प्रदेश में पहले उपराष्ट्रपति मध्य प्रदेश में एक रहे  हैं। शंकर दयाल शर्मा फिर राष्ट्रपति भी रहे हैं वो देश के। लेकिन इसके बाद फिर  मध्य प्रदेश को ऐसा मौका नहीं मिला है। सूत्रों की मानें तो शिवराज तो नहीं चाहेंगे  वो तो चाहते हैं अभी और 10 साल राजनीति करूं। जहां तक मोदी और शाह का सवाल हैं तो कोई चौंकाने वाला ही नाम उपराष्ट्रपति के लिए सामने आ सकता है।