शाजापुर कलेक्टर की कार्रवाई पर हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'अधिकारों का दुरुपयोग कर अधिकारी को किया प्रताड़ित'
शाजापुर/इंदौर।
मध्य प्रदेश की शाजापुर कलेक्टर रिजू बाफना (IAS) इन दिनों हाई कोर्ट की गंभीर टिप्पणियों और प्रशासनिक विवादों के घेरे में हैं। इंदौर हाई कोर्ट की बेंच ने जिला आबकारी अधिकारी (DEO) विनय रंगशाही के निलंबन मामले में सुनवाई करते हुए कलेक्टर की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना है कि कलेक्टर ने अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर द्वेषपूर्ण कार्रवाई की है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब 23 अगस्त 2025 को विनय रंगशाही ने शाजापुर में जिला आबकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। आरोप है कि पदस्थापना के बाद से ही कलेक्टर रिजू बाफना उनसे असंतुष्ट थीं और उन्हें पद से हटाकर अपनी पसंद के अधिकारी को प्रभार सौंपना चाहती थीं। कलेक्टर ने संभाग आयुक्त या राज्य सरकार की अनुमति के बिना ही 20 जनवरी 2026 को विनय रंगशाही से प्रभार छीनकर सहायक आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को सौंप दिया। रंगशाही को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से उनकी 5 दिन की सैलरी काटी गई और पिछले 5 महीनों से उनका वेतन रोक दिया गया। प्रभार वापस लेने के करीब 20 दिन बाद (13 फरवरी 2026) उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस का जवाब देने के बावजूद, उसी दिन कलेक्टर की अनुशंसा पर संभाग आयुक्त ने उन्हें निलंबित कर दिया।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप और 'स्टे'
अन्याय के खिलाफ विनय रंगशाही ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निलंबन पर रोक (Stay) लगा दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा कि "प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि कलेक्टर ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है।" इस आदेश के बाद विनय रंगशाही ने पुनः शाजापुर में अपनी कुर्सी संभाल ली है।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: 'शराब सिंडिकेट' का खेल?
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी किया गया है कि जिस अवधि में विनय रंगशाही को हटाया गया, उसी दौरान शाजापुर जिले से अवैध शराब का बड़ा कारोबार पनपा। इंदौर के लसुड़िया थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, शाजापुर की मक्सी स्थित शराब फैक्ट्री/गोदाम से दो ट्रक अवैध शराब इंदौर में पकड़ी गई।
सवालिया निशान: जब जिले की कमान निमिषा परमार और निधि जैन (अतिरिक्त प्रभार) के हाथों में थी, तब यह अवैध कारोबार कैसे हुआ? क्या रंगशाही को इसलिए हटाया गया ताकि अवैध शराब की तस्करी सुगम हो सके?
क्या कहते हैं जानकार
वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन का मानना हैं कि "यदि कलेक्टर निष्पक्ष हैं, तो अवैध शराब पकड़े जाने पर उन्होंने निमिषा परमार और निधि जैन पर कार्रवाई क्यों नहीं की? एक अधिकारी के पीछे हाथ धोकर पड़ना और दूसरे की गलतियों पर आंखें मूंद लेना उनकी निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है।"
आगे क्या?
अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार हाई कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बाद कलेक्टर रिजू बाफना के विरुद्ध कोई प्रशासनिक कदम उठाती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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