कुबेरेश्वर धाम बना मौत का धाम: धाम पर बुलाकर मौतों पर नाच रहा कथाकार बाबा प्रदीप मिश्रा
सीहोर,सबकी खबर।
भोपाल के पास सिहोर में कुबेरेश्वर धाम पर अव्यवस्थाएं हैं। लोग मारे जा रहे हैं और वहां के जो पीठाधीश्वर हैं पंडित प्रदीप मिश्रा लापता हो गए हैं। अपनी जिम्मेदारी से भाग खड़े हुए हैं। मीडिया को मिल नहीं रहे हैं। एक-एक करके धाम लाशें उगलता जा रहा है और प्रदीप मिश्रा गायब हैं। प्रदीप मिश्रा पर गैर इरादतन हत्या का केस रजिस्टर होना चाहिए। गुरूवार को सीएम हाउस में हुई पत्रकार वार्ता में सबकी खबर ने इस विषय में मुख्यमंत्री मोहन यादव को सवाल भी किया। उन्होंने कहा मैं उचित कदम उठा रहा हूं। अब क्या उचित कदम होंगे आने वाला समय ही बता पाएगा। लेकिन कथाकार जब सोशल मीडिया पर कथाएं कर रहे हैं। लोग सुन भी रहे हैं तो लोगों को धाम पर क्यों बुलाते हैं? सिर्फ बुलाते हैं पैसे के लिए। बडा सीधा फंडा हैं बुध को आइए, मंगल को आइए, चार मंगल करिए तो आपकी समस्याओं का समाधान होगा। और यह तमाम सारे जो प्रलोभन दिए जा रहे हैं, जो संकट में लोग रहते हैं, घर की समस्याएं लोगों की रहती हैं। वो बेचारे मजबूरी में आते हैं। लोगों से पैसा उधार लेकर आते हैं और इसके बाद में मिलता क्या है? मौत मिलती है। विगत तीन साल में अब तक करीब-करीब एक दर्जन से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। करीब 15 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। और अब गत दो दिनों से धाम लगातार लाशें उगल रहा है। परसों दो लोग मरे, कल तीन लोग मरे और आज भी तीन से चार लोगों के मौत की खबर आ रही है। आखिर वो भी किसी के परिवार के लोग हैं और बेशर्मी इतनी के जब लाशें रखी हुई थी तब यही प्रदीप मिश्रा नृत्य कर रहे थे, नाच रहे थे। प्रदीप मिश्रा यह सब आपके भक्त हैं। आप किसी के घर गए शोक व्यक्त करने आपने मीडिया पर कोई बयान जारी किया इन मौतों को लेकर क्या थोड़ी बहुत शर्म आपकी आंखों में है? क्या आप लाशों पर पूरी कथा करेंगे? हमने इस संबंध में कांग्रेस के एक वरिष्ठ जो कि एक कथाकार भी हैं कांग्रेस पार्टी के मध्य प्रदेश के मीडिया अध्यक्ष मीडिया विभाग के अध्यक्ष भी हैं। लेकिन इन्होंने भी कथाएं की हैं। इन्होंने भी तमाम सारे प्रवचन किए हैं मुकेश नायक से समझेंगे कि इन कथाकारों को लेकर सरकार को कोई नई नीति बनाना चाहिए। जगह-जगह पर हम चाहे रावतपुरा हो चाहे बागेश्वर हो या पंडोघर सरकार को हर जगह लोगों की भीड़ और व्यवस्थाएं कुछ भी नहीं। एक-एक रोटी को और एक-एक पानी बूंद पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। तो हम मुकेश नायक से समझते हैं कि क्या समय आ गया है कि अब कथाकारों पर भी कोई कंट्रोल है। क्या नियम कोई बनाना चाहिए?
भाजपा सरकार के एजेंट हैं प्रदीप मिश्रा
श्री नायक ने कहा किगोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कालहि मैट सकह त्रिपुरारी। इसका अर्थ यह है कि मृत्यु के संयोग को भी बदलने वाले ईश्वर है भगवान शिव। और गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है तुम त्रिभुवन गुरु वेद बखाना आन जीव पावर का जाना समस्त त्रिभुवनों के अधिपति और गुरु अनादि अनंत स्वस्फूर्त स्वयं प्रकाश और अपरिवर्तनशील रहते हुए भी संपूर्ण परिवर्तनों के अधिष्ठाता भगवान शिव हैं। उनके धाम में लाशें निकल रही है उनके भक्तों की। यह कैसा संजोग है यह कैसे भक्त हैं देखिए बेसिक बात यह है कि महात्मा बुद्ध ने कहा था कि आंख बंद करके ईश्वर को मानो और अभी समस्या यह है कि अभी जो अंधभक्त हैं यह आंख बंद करके ऐसे अज्ञानी और अल्पज्ञ लोगों के पीछे इस उम्मीद से दौड़ रहे हैं कि यहां कुछ मिल जाएगा। हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। हमारी घुटन बेचैनी कम हो जाएगी। हमारे दुख कम हो जाएंगे। अगर सरकार यह काम कर रही होती दुख दूर करने का, गरीबी दूर करने का तो ऐसे अज्ञानी और अल्पज्ञ लोगों के पीछे ऐसे लोग क्यों दौड़ते?
मूर्खता भरी बात करते हैं कथाकार प्रदीप मिश्रा
दूसरी बात आप कह रहे हैं कि इन पर मुकदमा क्यों नहीं दर्ज हुआ? जो कथाकार यह कह रहा हो कि अमित शाह भगवान शिव के अवतार हैं। अब मोहन यादव की बिसात है कि उन पर कार्यवाई कर ले। आप कल्पना करो यह कैसा कथाकार है के एक नेता को कह रहा है कि शिव के अवतार हैं। समझ के परे है। पिछले दिनों मां राधा रानी के बारे में एक टिप्पणी दी और वृंदावन में नाक रगड़ना पड़ी जाकर। अभी भगवान चित्रगुप्त के बारे में टिप्पणी कर दी। पूरे लोग नाराज हैं। यह टोटके टोने तंत्र यंत्र इसकी झूठी बात करने वाले यह मूर्ख और अल्पज्ञ लोग और निकृष्ट किस्म के चमचे और खुशामतखोर लोग यह बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। ये कोई कथावाचक या कोई ये संत थोड़ी है? आप बताइए संत हैं जो कह रहे हैं कि अमित शाह शंकर भगवान के अवतार हैं। मेरा सीधा सवाल यह है कि क्या उन पर प्रकरण दर्ज होना चाहिए? आपकी क्या मान्यता है? हम तो कह रहे हैं कि कानून किसी का प्रिविलेज थोड़ी है। कानून किसी का विशेष अधिकार थोड़ी है। जब दूसरी जगह पर लोग मरे भगदड़ में जब उन पर मुकदमे दर्ज हुए हैं तो इन पर क्यों नहीं होना चाहिए? पर मैं यह कह रहा हूं कि यह बीजेपी के कार्यकर्ता हैं। यह बीजेपी के नेता हैं और बीजेपी और इस सरकार का यह स्वभाव है कि अपने नेताओं पर, अपने मंत्रियों पर, अपने कार्यकर्ताओं पर कभी यह कार्रवाई करते हैं? बताइए आप कल परसों से यह चल रहा है आपने अखबार में सोशल मीडिया में कहीं संवेदना के दो शब्द देखे कहीं आपको लग रहा है चाहे बीजेपी हो या ये इनका जो धाम है जो कुबेरेश्वर धाम है धाम की ओर से ही कभी कहा गया हो या ये कहा गया हो कि हम धाम से इन परिवारों की कोई मदद करेंगे आर्थिक मदद आखिर ये इतनी असंवेदनशीलता क्यों है कुबरेश्वर ये बागेश्वर ये फलाने ये ठिकाने ये वोट उत्पादन की फैक्ट्रियां हैं।
अज्ञानी कथाकार की चरण वंदना कर रही हैं जनता
यहां वोट छापे जाते हैं। यह बीजेपी के आस्था, धर्म और श्रद्धा और अंधी श्रद्धा के औजार हैं। यह निरर्थक और को निर्मूल परंपराओं को लोगों के सामने रख के लोगों की आंख में धूल झोंकते हैं। तो फिर आपके पार्टी के नेता क्यों दंडवत होते हैं? इसलिए दंडवत होते हैं कि नेता उसी के पास जाता है जिसके आसपास भीड़ होती है। उसको लगता है यहां से हमें वोटें मिल जाएंगी। लोग देख लें। सभी पार्टी के लोग यह करते हैं। यह बड़ा दुर्भाग्य है इस देश का कि इस अंधी श्रद्धा के खिलाफ जहां खड़े होने की बात है, वहां ऐसे मूर्ख और अज्ञानी लोगों की चरण वंदना कर रहे हैं नेता लोग। सच्चाई यह है कि जो लोग बेचारे ये इनके इनके जाल में फंस रहे हैं। क्या अब यह समय आ गया है कि एक कानून बनना चाहिए। क्या समय आ गया कि जन जागरण शुरू होना चाहिए कि इनके चुंगल में ना फंसे। विधानसभा में चर्चा ही नहीं कर रहे। विधानसभा चल रही थी जब मौतों वहां की लाशें निकलना शुरू हुई। 230 में से एक विधायक ने खड़े हो के नहीं बोला कि हम 48 घंटे से रोड बंद पड़ी हुई है। इंदौर भोपाल इन मुद्दों पे कौन बोलेगा? जिन्हें हम चुन रहे हैं वही नहीं बोल रहे। वो चुप्पी साध के बैठे हैं। चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी हो। जनता का यह दुर्भाग्य है कि वो अभिशप्त है ये सारे भुगतने के लिए। लोग यह सब भुगतने के लिए अभिशप्त रहेंगे और आंखें बंद करके जो अल्पज्ञ अज्ञानी और मूर्ख लोग इन मूर्खों के पीछे दौड़ते हुए यह मूर्खों की सभा है। एक बार राजा जनक की सभा में अष्टावक्र ने यह कहा था कि ये मूर्खों की सब सभा है। यहां मूर्खता पर बहस चल रही है। अष्टावक्र जी राजा जनक की सभा में गए तो उनके सम्मान में उठकर खड़े हो गए। राजा जनक तो अष्टावक्र जी उनके सिंहासन पर ही बैठ गए। सभासदों को बुरा लगा। तो उन्होंने कहा मूर्खों यह सिंहासन अमर है क्या? और ये सिंहासन भी झूठा है। इस पर बैठा आदमी भी झूठा है। अभी दो-दो एक-एक लाशें निकल रही हैं। जब एकदम थोक में लाशें निकलेंगी तब हम कानून बनाएंगे। तब हम जगेंगे। आखिर होगा क्या? ये जो इंदौर भोपाल और इंदौर रोड पर ये इतना बड़ा धाम बना दिया है। अंधभक्तों की लाइन लगी है। इतने अंधविश्वासों के खिलाफ वैज्ञानिकों ने प्रचार किया कि चेतना जागे। अभी रावतपुरा पे भी एफआईआर हो गई है। रावतपुरा महाराज पे भी एफआईआर हो गई है। सब बिजनेस कर रहे हैं। मुकेश नायक का साफ कहना है कि प्रदीप मिश्रा मूर्ख है। मूर्ख शब्द का आज उपयोग किया है। कांग्रेस के इस कुर्सी पर बैठकर उन्होंने कहा प्रदीप मिश्रा मूर्ख है। अब जनता को तय करना है कि इनकी बातों में आना है या मुकेश नायक जी की बात को सुनना है।

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