मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा की बदहाली पर सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
भोपाल।
देश में शिक्षा की बदहाली का स्तर कितना गिरा हुआ हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देशभर के लगभग 15 लाख स्कूलों में 10 लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और यह बात स्कूली शिक्षा संसदीय स्थाई समिति के चेयरमैन और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बाकायदा अपने Facebook पेज पर लिखा है। उन्होंने कहा है कि हमने यह रिपोर्ट जो एक समिति की जो रिपोर्ट है वार्षिक रिपोर्ट है उसको सबमिट किया है और जो अनुशंसाएं की है। आप अंदाज लगाइए कि शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा भारत में। भारत में यदि स्कूली शिक्षा में 15 लाख स्कूलों में 10 लाख पद खाली पड़े होंगे तो कैसे स्तर सुधरेगा? यदि दिग्विजय सिंह नहीं बताते तो हमें पता भी नहीं चलता। जब दिग्विजय सिंह को ने Facebook पेज पर पोस्ट की हैं 10 लाख पदों को भर्ती की जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि इसको आप अतिथि शिक्षक से ना करें। जो संविदा भर्ती है वो ना करें। इससे जो आरक्षण को लाभ मिलता है उनको नहीं मिल पाता। वो बेचारे वंचित रह जाते हैं। यह भी उन्होंने कहा है। यह बहुत ही चिंताजनक बात भी यह है।उन्होंने राज्य सरकारों के संचालित स्कूल, नवोदय स्कूल और केंद्रीय विद्यालय केंद्रीय विद्यालयों की बड़ी साख रही है और नवोदय स्कूल भी ऐसे रहे जो गरीब छात्रों के लिए एक तरह से वरदान थे। उसके बारे में उन्होंने उल्लेख किया है कि 10 लाख पद जो है वह खाली है। अगर हम सरकारी आंकड़े देखते हैं तो तकरीबन 10 लाख ही सरकारी स्कूल हैं। इन सारे स्कूलों को अगर हम मिला लें देश भर में जो 14 लाख कुछ 15 लाख के आसपास जो स्कूल है उसमें 10 लाख से अधिक स्कूल जो है सरकारी स्कूल हैं। और ये 2021 की रिपोर्ट के अनुसार और ये लगभग 68% है। अब तो बंद हो गए होंगे उसमें बहुत से अगर हम बात करें इसलिए कि सरकारों ने स्कूलें बंद करना शुरू कर दिया है। उल्टी चीजें बहुत चौंकाने वाली बात यह है कि एनसीटीई के स्थाई स्टाफ की भर्ती करने की भी सिफारिश की है उस समिति ने और उसमें 2019 से यह भी बहुत चौंकाने वाली बात है। एक भी भर्ती नहीं हुई है। केंद्र में भले भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो लेकिन अलग- अलग राज्यों की में अलग-अलग सरकारें हैं। लेकिन सबके रवैया तकरीबन एक जैसे ही हैं इन स्कूलों के को लेकर। दूसरा उन्होंने जो बीएड, डीएड इस तरह की जो प्रशिक्षण धीरे-धीरे कोर्स जो है उसको उसको वो स्थित दर्जा नहीं रहा है। उसके बारे में भी उन्होंने कहा है कि इसको अधिक महत्व दिया जाना चाहिए जिससे शिक्षा में सुधार होगा। दूसरा उन्होंने जो छोटे-छोटे खासतौर से उन्होंने यह कहा है कि जो इसमें लंबे समय से जो इस तरह के कोर्सेज हैं जो छोटे-छोटे चलाए जा रहे हैं उसको विस्तृत चलाया जाए। इस तरह की उन्होंने कई कई चीजों को का उल्लेख किया है उन्होंने यह भी किया है कि जो जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान जो उसका विस्तार हो और उसका सशक्तिकरण किया जाए। मतलब जिस तरह से दिग्विजय सिंह ने ये पोस्ट अपने Facebook पोस्ट में की है और सरकार को उन्होंने सौंपी भी है। वो वास्तव में चौंकाने वाली है।

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