अपना मध्यप्रदेश... जेल में रहकर कैदी बने लखपति, हत्या के मामले में काट रहे थे सजा
सतना।
79वें स्वतंत्रता दिवस पर मध्य प्रदेश के केंद्रीय जेल सतना सहित विभिन्न जेलों से 17 बंदियों को रिहा किया गया.इनमें सबसे खास रिहाई चार सगे भाइयों की रही, जो एक साथ जेल से बाहर आए.ये चारों भाई न केवल आजाद हुए बल्कि जेल में रहकर मेहनत से कमाई गई रकम के साथ लखपति बनकर घर लौटे. रिहा होने वालों में सतना के 4 पुरुष बंदी, मैहर के 1, छतरपुर के 10, पन्ना के 1 और सीहोर के 1 बंदी शामिल हैं.इनमें तीन बंदी खुली जेल के भी थे.सभी बंदी राज्य शासन द्वारा घोषित परिहार का लाभ लेकर अपनी सजा पूरी कर चुके थे.
छतरपुर से भेजे गए थे सतना जेल
कृपाल यादव, भागवत यादव, गोपाल यादव और राजू यादव छतरपुर जिले के छुलहा पुरवा गांव के निवासी हैं.साल 2010 में उनका विवाद पड़ोसी टिकरी गांव के लोधी परिवार से जमीन को लेकर हुआ था.विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई और लोधी परिवार के दादू लोधी, राजाराम लोधी और राम लोधी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.इस मामले में कोर्ट ने 8 अगस्त 2012 को चारों भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.तब से वे सतना की केंद्रीय जेल में सजा काट रहे थे।
13 साल बाद हुई घर वापसी
अब 13 साल बाद 15 अगस्त 2025 को उन्हें रिहा किया गया.जेल में रहकर उन्होंने विभिन्न कार्यों में हिस्सा लिया और पारिश्रमिक के रूप में करीब 3 लाख रुपये अर्जित किए.यह राशि जेल प्रशासन ने रिहाई के समय उन्हें प्रदान की।इनके अलावा केंद्रीय जेल के दो अन्य बंदी भी लखपति बनकर निकले.ददोली जोशी पिता राम सजीवन जोशी को 1,13,186 रुपये और राजेश मावसी पिता गलबतिया मावसी को 1,07,023 रुपये मिले.जेल में बंदियों से विभिन्न प्रकार का काम कराया जाता है, जिसके बदले उन्हें वेतन के रूप में यह रकम दी जाती है.

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