सतना। 
एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है। कई सरकारी कामकाज ऑनलाइन करने की प्रोसेस कर दी गई है। वहीं, सतना जिले के ग्रामीण इलाकों में शिक्षक मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था का दंश झेलने को मजबूर हैं। आलम यह है कि उचेहरा विकासखंड के एक स्कूल में शिक्षकों को अपनी अटेंडेंस लगाने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालना पड़ता है। दरअसल, एक तस्वीर उचेहरा के पहाड़ी संकुल केंद्र में स्थित माध्यमिक विद्यालय उरईचुआ से सामने आई। यहां शिक्षक जान जोखिम में डालकर छत में चढ़ते नजर आए। स्कूल भवन के अंदर मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं आता। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को एम-शिक्षा मित्र ऐप पर दिन में दो बार हाजिरी लगाना है। इसमें स्कूल आने और छुट्टी के समय ऑनलाइन हाजिरी शामिल है।
छत पर भी नहीं मिलता सिग्नल
नेटवर्क की तलाश में यहां पदस्थ शिक्षक और गेस्ट टीचर्स हर रोज स्कूल की छत पर चढ़कर कोना-कोना तलाशते हैं। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी जब सिग्नल नहीं मिलता और समय पर हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में एप्लिकेशन उन्हें अनुपस्थित मान लेता है। इसका खामियाजा उन्हें अपनी सैलरी कटवा कर भुगतना पड़ता है। बताया जा रहा है कि इस तकनीकी समस्या के कारण कई शिक्षकों को आधे से भी कम वेतन मिला है।
जिले के कई स्कूलों का यही हाल
यह समस्या सिर्फ उरईचुआ स्कूल तक ही सीमित नहीं है। जिले के परसमनियां और मझगवां जैसे पठारी विकासखंडों के दर्जनों गांवों में स्थित स्कूलों का भी यही हाल है। यहां के शिक्षक लगातार विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने या ऐसे क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन उपस्थिति का विकल्प देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
नेटवर्क तलाशने में समय होता है बर्बाद
इस अव्यवस्था के कारण एक तरफ जहां शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि शिक्षकों का कीमती समय नेटवर्क की तलाश में ही बर्बाद हो जाता है।