मुख्यमंत्री पद को लेकर बयानबाजी तेज, राउत ने भाजपा पर साधा निशाना
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए एक बड़े बदलाव के तहत भारतीय जनता पार्टी द्वारा शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर विपक्षी खेमे ने तीखा प्रहार किया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सांसद संजय राउत ने इस निर्णय पर तंज कसते हुए भाजपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध स्वयं भाजपा ने लंबे समय तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन चलाया था, आज उसी को सर्वोच्च पद पर आसीन कर दिया गया है। राउत ने इस घटनाक्रम को भाजपा की उस कथित परंपरा का हिस्सा बताया जिसमें दूसरे दलों से आने वाले दागी नेताओं को महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जाता है।
राजनीतिक शुचिता और भाजपा की नीति पर सवाल
संजय राउत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल अपनी स्थापित परंपराओं को निभाने में सबसे आगे है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पूर्व तक इसी मुख्यमंत्री के खिलाफ पूरी भाजपा मशीनरी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतरी थी। शिवसेना नेता के अनुसार यह विडंबना ही है कि जिस नेता के विरुद्ध भाजपा ने महीनों तक सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से मुहिम चलाई थी, आज उसी नेतृत्व को उन्होंने बंगाल की कमान सौंप दी है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को नैतिकता के नजरिए से भाजपा की बड़ी विफलता करार दिया है।
भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच एजेंसियों का जिक्र
विपक्षी प्रवक्ता ने अतीत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि संबंधित नेता को सार्वजनिक रूप से संदिग्ध लेन-देन के मामलों में घिरा हुआ देखा गया था, जिसके बाद उन पर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यवाही भी हुई थी। राउत ने तंज भरे लहजे में कहा कि भाजपा में शामिल होते ही जैसे सारे आरोप धुल गए हों और अब उन्हें एक महान व्यक्तित्व के रूप में पेश कर राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया है। उनके अनुसार यह भाजपा की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ बाहर से आने वाले विवादित चेहरों को भी उच्च सम्मान और पद प्रदान किया जाता है।
तमिलनाडु के बदलते सियासी समीकरणों पर टिप्पणी
बंगाल के घटनाक्रम के साथ-साथ संजय राउत ने दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की बदलती राजनीति पर भी अपनी राय साझा की। कांग्रेस द्वारा पुराने गठबंधन को छोड़कर नए विकल्पों की तलाश करने और विजय थलापति की पार्टी के प्रति झुकाव दिखाने पर उन्होंने इसे राजनीति की चंचलता बताया। उन्होंने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने इस विषय पर मौजूदा सहयोगियों से विस्तार से चर्चा की है ताकि आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत विकल्प तैयार किया जा सके। राउत को विश्वास है कि गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेद आने वाले समय में आपसी संवाद से सुलझा लिए जाएंगे।
विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति
संजय राउत का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों को कई बार कड़े और अप्रत्याशित निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु हो या बंगाल, मुख्य लक्ष्य सत्ता पक्ष की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना है। उन्होंने भाजपा पर हमला जारी रखते हुए कहा कि जिस तरह की तानाशाही और अवसरवाद की राजनीति वर्तमान में देखी जा रही है, उसका अंत देश की जनता ही करेगी। शिवसेना नेता ने दोहराया कि सिद्धांतों की राजनीति करने के बजाय भाजपा केवल सत्ता प्राप्ति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखती है।

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