भोपाल/कटनी। 
मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर और अरबपति विधायक संजय पाठक एक बार फिर कानूनी और सियासी चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बार मुसीबत की वजह कोई माइनिंग या आर्थिक घोटाला नहीं, बल्कि एक दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने का बेहद गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में अब उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की मांग उठने लगी है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विजयराघवगढ़ में खुद को पत्रकार बताने वाले और विधायक संजय पाठक के बेहद करीबी (खास सिपहसालार) शेरा मिश्रा पर एक महिला ने ब्लैकमेलिंग और दुराचार (रेप) का संगीन आरोप लगाया है। शिकायत के बाद आरोपी शेरा मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन, असली बखेड़ा तब शुरू हुआ जब इस मामले में अपनी और पार्टी की किरकिरी होते देख विधायक संजय पाठक ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। आरोप है कि उन्होंने पीड़ित महिला के ससुर को अपने बगल में खड़ा करके एक वीडियो बयान जारी किया। इस वीडियो में विधायक ने न सिर्फ उस व्यक्ति का नाम और चेहरा दिखाया, बल्कि गांव का नाम और पीड़िता से उनका रिश्ता भी जगजाहिर कर दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया।
डीजीपी और एसपी से शिकायत, एफआईआर की मांग
संजय पाठक द्वारा पीड़िता की पहचान उजागर करने के बाद मामला कानूनी रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। इस संबंध में बृज किशोर विश्वकर्मा नामक व्यक्ति ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP), कटनी एसपी और विजयराघवगढ़ थाना प्रभारी को एक लिखित आवेदन देकर विधायक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट और भारतीय कानून (IPC/BNS) के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म पीड़िता की पहचान (या ऐसी कोई भी जानकारी जिससे उसकी पहचान हो सके, जैसे परिवार के सदस्यों का नाम या गांव) उजागर करना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। ऐसा करने पर सीधे एफआईआर और गिरफ्तारी का प्रावधान है।
बैकफुट पर पुलिस, अधिकारियों पर भी लटकी तलवार
इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध रही है। आरोप है कि एफआईआर दर्ज होने से पहले जब विजयराघवगढ़ पुलिस ने शेरा मिश्रा को उठाया था, तब रसूखदारों के फोन आने के बाद उसे छोड़ दिया गया था। बाद में महिला थाने में मामला दर्ज होने और मीडिया ट्रायल के दबाव के बाद आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी। जानकारों का कहना है कि यदि कटनी पुलिस ने इस मामले में बीजेपी विधायक संजय पाठक पर एफआईआर दर्ज नहीं की, तो यह मामला हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। ऐसे में कानून का पालन न करने के दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों (एसपी और टीआई) पर भी न्यायालय की गाज गिर सकती है।
चौतरफा मुसीबतों में घिरे पाठक
संजय पाठक के लिए मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हो रहीं। हाल ही में उन पर रजिस्ट्री के मामलों में हेरफेर और नियमों के उल्लंघन को लेकर लगभग 5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। उन पर अवैध माइनिंग (एक्सेस माइनिंग) और आदिवासियों की जमीनों से जुड़े मामलों को लेकर भी लगातार आरोप लगते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यदि यह कानूनी विवाद और गहराता है, तो आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अपने इस अरबपति विधायक से पल्ला झाड़ सकती है। फिलहाल, देखना यह होगा कि कटनी पुलिस प्रशासन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत विधायक संजय पाठक पर क्या एक्शन लेता है।