रीवा, सबकी खबर।  
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिमरिया के विधायक अभय मिश्रा ने बाकायदा मंच से आरोप लगाते हुए कहा ​है कि रीवा में जो एसपी हैं, पुलिस अधीक्षक हैं, वे अर्धनारीश्वर हैं। एसपी अर्धनारीश्वर हैं और वे शराब वालों से ₹25 लाख महीने लेते हैं। एक जिम्मेदार विधायक जो कांग्रेस के विधायक हैं। पहले  यह बीजेपी में रह चुके हैं। अभी कांग्रेस के विधायक हैं और खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि  वे ₹25 लाख महीने लेते हैं। इसके अलावा वे वहां स्थानीय नेता शुक्ला की चरण वंदना करते हैं और उसके बाद पूरा रीवा जलने के  लिए विवश है। अभिशप्त है। वहां किसी की भी इज्जत लूटी जा सकती  है। किसी को भी मारा जा सकता है। किसी को भी गोली मारी जा सकती है। सवाल यह है कि क्या एक इतना जिम्मेदार  विधायक इस तरह के आरोप लगा सकता है?  मैं यहां की एक लिस्ट बनाया हूं। यहां के जो अर्ध नारेश्वर एसपी है आधा महिला आधा पुरुष उनको तो 25 लाख और 50 लाख महीना शराब के ठेका से से आता हैं फॉरेस्ट वाले देते हैं उनका एक ही काम है कि कुर्सी ना बदल जाए तो शुक्ला की चरणवंदन करो और रीवा को जलने दो जिसके जिसकी इज्जत लूट लेनी हो जिसको गोली मार देनी हो मार दो लेकिन उनकी कुर्सी बची रहे। सवाल यह है कि क्या कोई जिम्मेदार नेता इस तरह के आरोप भरे मंच से लगाता है? क्या उनके पास कोई प्रूफ़ है? और यदि प्रूफ़ है, तो वह विधानसभा में क्यों नहीं रखते? क्यों नहीं जांच एजेंसियों को देते हैं? बड़ा चिंतन करने वाला विषय है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद रीवा आईजी मध्य प्रदेश के डीजीपी क्या कार्रवाई करते हैं यह सोचने वाली बात है। इसकी जांच जरूर होनी चाहिए। वास्तव में  यदि एसपी वहां इस तरह से ₹25 लाख महीना शराब वालों से ले रहा है तो गंभीर आरोप है  और यदि झूठा आरोप लगाया गया है तो क्या इन विधायक के खिलाफ कोई कारवाई होगी।  लेकिन चिंतनीय प्रश्न यह है कि प्रदेश में इस तरह के आरोप खुलेआम किसी एसपी पर जो आईपीएस हैं उन पर यह आरोप लगाना कि वे अपनी कुर्सी बचाने के लिए नेताजी की चरण वंदना करते हैं या फिर उसके बाद कही भी रेप होता रहे किसी को भी गोली मारी जाए। इस तरह की बातें सशक्त राजनीति के लिहाज से कही से भी तर्कसंगत नहीं हैं। डीजीपी मध्य प्रदेश के गृह मंत्री जो मुख्यमंत्री भी हैं इस पूरे मामले को संज्ञान लेना चाहिए और जांच करना चाहिए कि वास्तव में विधायक सही कह रहे हैं या यह आरोप झूठे हैं।