राजगढ़ का एक भ्रष्टाचारी अधिकारी भोपाल में कर रहा हैं मजे
भोपाल/राजगढ़
मध्य प्रदेश के राजगढ़ में लगभग पौने दो करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप में मध्य प्रदेश वित्त विभाग के बड़े अधिकारी के खिलाफ एफआईआर हुई है और इस अधिकारी को एहसास हो गया था कि अब वह पकड़ा जाने वाला है। यही कारण है कि एफआईआर होने से 2 महीने पहले उसने अपना तबादला राजगढ़ से भोपाल करा लिया और यह सुनकर आप चौंक जाएंगे कि यह अधिकारी इस समय भोपाल में नगरीय प्रशासन में संयुक्त संचालक वित्त बना दिया गया है और इस अधिकारी का नाम है रामजी लाल गोलिया। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार का स्तर कितना उंचा हो गया है। कि पूरे भुगतान का 80 प्रतिशत अधिकारी ही डकार गए। लगभग ₹1 करोड़ 90 लाख के भुगतान में ₹1 करोड़ 58 लाख अधिकारियों के जेब में गया है। और यह सीधा-सीधा प्रूफ हुआ है। इसमें कहीं कोई ऐसा नहीं है कि इसमें पुलिस में शिकायत हुई। पुलिस ने जांच की और पुलिस ने भी माथा पकड़ लिया कि किस तरह भ्रष्टाचार हो रहा है। दरअसल भोपाल की एक कंपनी है नेशनल सिक्योरिटी कंपनी। उसे काम दिया गया था राजगढ़ में सरकारी अस्पताल में सफाई कामगारों की नियुक्ति का और जो सामान सप्लाई है उसका काम मिला था। अब आप अंदाज लगाइए कि 40 सफाई कर्मचारियों का वेतन निकाला जा रहा था और आप देख के दंग रह जाएंगे कि इसमें केवल आठ कर्मचारी काम कर रहे थे। 32 लोगों का फर्जी तरीके से वेतन निकाला जा रहा था। भ्रष्टाचार की भी कोई सीमा होती है। पहले बोलते थे कि आटे में नमक अब तो नमक में आटा डाला जा रहा है। जिस तरह का कुछ हो रहा है वो निश्चित तौर पर बड़े चौंकाने वाला है और अधिकारी इतना शातिर कि उसे पता था कि अब पुलिस मुझे पकड़ेगी तो वो तत्काल राजगढ़ से भाग के भोपाल आ गए और भोपाल में भी ऐसी जगह पोस्टिंग कराई है। ऐसा लगता है कि वित्त मंत्री जो उप मुख्यमंत्री भी हैं वो बिल्कुल तैयार बैठे थे कि आ मेरे माल तेरे को बढ़िया पोस्टिंग देता हूं। जिस तरह पोस्टिंग हुई है उससे तो लगता है कि वित्त मंत्री के यहां का कोई बड़ा व्यक्ति मिला हुआ है इससे। आप सोचिए नगरीय प्रशासन में कितना बजट होता है। एक व्यक्ति जो राजगढ़ में अस्पताल में बैठ के धांधली कर रहा है और वहां से 1 करोड़ 58 लाख लेके निकल आया है। पुलिस उसको तलाश रही है और वो यहां आके बैठ गया। नगरीय संचालनालय में बैठ गया और यहां तो अरबों रुपए का बजट है। आप अंदाज लगाइए। सारा बजट उसकी मुट्ठी में दे दिया। हुआ यह है कि यह जो रामजीलाल गोलिया है यह वरिष्ठ कोषाधिकारी थे। कोशालय अधिकारी थे राजगढ़ में और वहां जो सरकारी पेमेंट होते थे वो उनकी देखरेख में होते थे। कोई नीरज गुप्ता भोपाल में इनका दलाल है। जो पहले पैसे लेता था बाद में वहां बिल सेंशन होते थे। पुलिस ने जब नीरज गुप्ता को उठाया तो नीरज ने बताया कि किस तरह रामजीलाल गोलिया के लिए काम करता हूं। रामजीलाल गोलिया तब तक पेमेंट नहीं करते थे लोगों के जब तक कि नीरज गुप्ता के पास पैसा नहीं पहुंच जाता था। नीरज भी गिरफ्तार हो गए हैं और अब गोलिया जी भी अंदर जाने की तैयारी में हैं। नेशनल सिक्योरिटी कंपनी का जो मालिक और उसके मैनेजर को भी गिरफ्तार कर लिया गया है क्योंकि इन लोगों ने यह सप्लाई की है। इन्होंने यह कर्मचारी दिए गए हैं और ये पूरा घपला खुल के सामने आ गया है। 40 में से आठ कर्मचारी काम करते थे। 32 की सैलरी मिलके बांट लेते थे। सैलरी के मामले में बताया गया कि करीब 61 लाख का जो भुगतान हुआ है उसमें से करीब साल लाख ही ओरिजिनल है बाकी तो खा गए। और इसके अलावा ₹1 करोड़ 26 लाख का कुछ सामान का सप्लाई हुआ है और सप्लाई हुआ है मात्र 22 लाख का ही सामान आयाहै। ₹1 करोड़ 4 लाख कैश खा गए। यह जो पुलिस ने यह जानकारी निकाली है इसमें से कुछ लोग गिरफ्तार हो गए इसमें कोई पार्षद दे दिया राजेश खरे उसको भी भारतीय जनता पार्टी का नेता है उसे भी पकड़ा गया है और यह जो मैनेजर है इस कंपनी का कृष्णा इसका मालिक कुलदीप मिश्रा और एक कर्मचारी रारामबाबू झाबा एक बाबू संजीव शर्मा माणक इन सबके खिलाफ एफआईआर हुई है और एफआईआर में बड़ा चौंकाने वाला बड़ा नाम है वित्त विभाग के अधिकारी रामजीलाल गोलिया का। अब रामजी लाल गोलिया का यह तो तय है कि नगरीय प्रशासन में भोंडवे साहब तो अब इसको नहीं रखेंगे। आयुक्त भोंडवे हैं आईएएस है उज्जैन कलेक्टर रहे हैं वो तो अब इसको नहीं रखेंगे। देखना है कि इनकी गिरफ्तारी होगी या यह कोई अग्रिम जमानत लेके आएंगे क्योंकि पुलिस तो धड़ाधड़ अरेस्ट कर रही है। जेल भेज रही है वहां पर तो यह तो यहां छुपे बैठे हैं। लेकिन बड़ी बात यह है कि वित्त विभाग के अधिकारी 1 करोड़ 58 लाख तो खा गए। यह केवल हेल्थ का पैसा है। यह तो पूरे विभागों को यही चलाते थे। कितना भ्रष्टाचार हुआ होगा। इन्हने किया होगा। अब तो यह जांच का विषय है। कायदे से इस पूरे मामले को तो ईओडब्ल्यू को टेक ऑफ कर लेना चाहिए या लोकायुक्त को तत्काल एफआईआर कर लेना चाहिए। तभी यह पूरा माल निकल पाएगा इनके पास से क्योंकि पुलिस के बस की बात नहीं है इतनी लंबी जांच करने का जितना इन्होंने भ्रष्टाचार किया होगा। वित्त विभाग के अधिकारी पर एफआईआर हुई है। एफआईआर पुलिस ने की है। उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं जताई जा रही है। कुछ लोग गिरफ्तार हो गए हैं और वे ठप्पे से बैठे हुए हैं। नगरीय प्रशासन में संयुक्त संचालक वित्त बनके। उम्मीद है कुछ ही दिन है उनके वहां पर। बहुत जल्दी पुलिस उनको यहां से ले जाएगी।

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