रीवा / भोपाल, सबकी खबर। 
मेरा स्मरण कर और युद्ध यानी अपने कर्तव्य  का पालन कर। यह श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा।  साथ ही यदि कोई  तुम्हें कहे कि वह तुम्हें गोली मार देगा तो अपनी छाती के बटन खोल दो।  जब तक तुम्हारा काल नहीं आएगा तब तक तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह संदेश संत प्रेमानंद  गोविंद महाराज ने वृंदावन की पावन भूमि पर  मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ला और उनके परिवार को दिया है। उन्होंने जो उपदेश दिया और उसमें एक  संदेश छिपा है। वह संदेश राजेंद्र शुक्ला  के लिए ही नहीं उन सबके लिए जो देश की  राजनीति में सिरमौर हैं। राजनीति में  सत्ता में जिनके पास प्रमुख स्थान है वो  किस तरह से राजनेता को सेवा करना चाहिए।  धर्म और अधर्म में अंतर करना चाहिए।  प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि अपने कर्तव्य का पालन किया जाए सत्य को साक्षी करके और भगवान का स्मरण होता रहे तो इसी जन्म में गृहस्थ होते हुए भी सांसारिक कार्यों को करते हुए भी वो भगवान की प्रसन्नता को प्राप्त हो सकता है। भगवान ने तस्मात सर्वदा सर्वकालेशु मामन युद्ध च अर्जुन को कह रहे हैं मेरा स्मरण बना रहे और युद्ध माने अपने कर्तव्य का पालन तो जो आपको पद मिला है जो आपको भारत सरकार की सेवा मिली है उस सेवा में ईमानदारी से हम अपने जो कर्तव्य हैं उनका पालन कर रहे हैं और कोई भय नहीं और कोई प्रलोभन नहीं ये दो चीज जीव को अपने कर्तव्य से गिरा देती हैं। भय और प्रलोभन किसी का दबाव या अर्थ की लोलुपता ये दो हमें कर्तव्यत कर देते हैं। तो इन दो से हमें बचना चाहिए। किसी का भय नहीं। जिसके सहायक भगवान है तो भय किसी का नहीं। अगर कोई जैसे ऐसे कहे ना कि हम आपको गोली मार देंगे तो बटन खोल देनी चाहिए। मार के दिखाओ। यदि उसको मंजूर है कि इसी क्षण हमें जाना है तो हम चाहे जितने कवच बांध ले बचेंगे नहीं और अगर उसको मंजूर नहीं है तो हम छाती खोल के चले तो भी कोई हमारा बाल बांका नहीं कर सकता इस सिद्धांत को समझ लेना चाहिए सीम के चाप सके को तासु बल रखवार रमापति जासु जिसके भगवान रक्षक है उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता तो किसी से भयभीत नहीं होना चाहिए और प्रलोभन जो हमें भगवान ने धर्म युक्त दिया है उसी से हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति करेंगे। अधर्म के द्वारा प्राप्त धन से जो इच्छाओं की पूर्ति की जाती है वह नाश की तरफ ले जाता है और जो धर्म से प्राप्त धन से इच्छाओं  की पूर्ति होती है वो उन्नति की तरफ ले  जाता है। इसलिए प्रलोभन और भय का त्याग  करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करते हुए  भगवान का स्मरण करें तो लौकिक उन्नति और  पारलौकिक दोनों होती है और यही हमारे मनुष्य जीवन का लाभ है क्योंकि मनुष्य  बनकर हम उन्नति को प्राप्त हो  बहुत बड़ी उन्नति में आ गए। 83999  योनियों को क्रॉस करके मनुष्य बने। 84 लाख योनियों में सबसे श्रेष्ठ योनि है। अब उसमें भी हमें भगवान ने विवेकवान बनाया। हमें भगवान ने भारत सरकार की सेवा दी। तो अब हम ऐसे कर्म करें कि इससे नीचे ना 
गिरे। इससे नीचे जीना अब आपके लिए नहीं हो सकता। जैसे मनो इतनी ऊंचाई पर हम आए  मनुष्य जीवन में और उसमें भी इसमें अब आप  नीचा जीवन पसंद नहीं करेंगे। अब ऊंचा जीवन पसंद करेंगे तो हम ऐसा भजन करें। ऐसा  कर्तव्य करें कि हमारा पद ऊंचा हो। हमारी  हमारी भावना यही अच्छे से स्वस्थ रहकर भारत की सेवा कीजिए और आगे बढ़िए। जो भगवान सेवाएं दें तो और आगे बढ़िए। पर धर्म का सहारा लीजिए। आज जो है हमारी समाज को अधर्म धीरे-धीरे गुण की तरह खोखला कर रहा है। छोटे-छोटे पदों से लेकर बड़े पदों तक अधर्म का प्रवेश हो रहा है। अधर्म झूठ बोलना, मदिरा पीना, परा स्त्री से व्यभचार करना, नाना प्रकार से धन आदि की इच्छाओं को रखना। यह अधर्म जब तो फिर समाज सेवा नहीं बनती। फिर समाज शोषण होता है। अगर हम धर्म से चले तो समाज प्रिय बनेंगे और समाज में ही भगवान विराजमान है। सब रूप सिया राम में सब जग जानी करो प्रणाम जो हम इस समाज के रूप में भगवान ही विराजमान है। तो आपने सुना प्रेमानंद महाराज ने वृंदावन में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और उनके परिवार को जो संदेश दिया प्रेमानंद महाराज ने उस पर राजेंद्र शुक्ला ने प्रतिक्रिया दी कि उन्हें यहां पहुंचकर परम विशिष्ट अनुभूति हुई है और यह संदेश उनके लिए सदैव मार्गदर्शन का काम करेंगे। महाराज ने जिस तरह से आज के युग में  सत्ता की चाह में सियासतदाद कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। उनके लिए एक बड़ा   संदेश है जैसा हम पहले भी कह रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई आपका बाल बांका नहीं कर सकता जब तक ईश्वर की इच्छा ना हो। और सेवा कार्य में धर्म और अधर्म का अंतर करना चाहिए। धर्म   मार्ग पर चल के ही सेवा कीजिए। अधर्म तो व्यभचार, मदिरापान और गलत ढंग से कमाए हुए। पैसे  से सेवा नहीं हो सकती।  84,000 योनियों के बाद मनुष्य का जीवन मिलता है और उसके द अगर इस तरह से सरकार में काम करने का अवसर मिले बड़े  दायित्व मिले तो यह तो आपका परम कर्तव्य है ऐसे में कि आप अपने कामों को अपने कर्तव्यों को समझें। लोगों की सेवा करें। आपको इससे और ऊपर जाना है। तो आप इसका खास ध्यान रखें और अपने कर्तव्यों से लोगों की सेवा करें। माध्यम धर्म को ही बनाएं। यह उपदेश प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज ने मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और उनके परिवार को दिया। उन्होंने संदेश दिया कर्तव्य पालन के बारे में कहा और साथ में यह भी कहा कि धर्म का रास्ता अपनाइए। अधर्म से दूर होइए। अधर्म से सिर्फ पतन होता है।