दो दिन में चार मौतों के जिम्मेदार प्रदीप मिश्रा पर क्या मोहन सरकार एफआईआर करेगी!
भोपाल/सीहोर, सबकी खबर।
बुधवार को फिर कुबेरेश्वर धाम पर दो मौतें हुई हैं। दो व्यक्ति आज फिर मारे गए वहां और यह मारे गए हैं केवल अव्यवस्था के कारण, भीड़ के कारण और वहां जिस तरह का माहौल बन चुका है उसके कारण । क्या प्रदीप मिश्रा आपको शर्म नहीं आती है? दो महिलाओं की लाश रखी रही और सुबह आप कावड़ यात्रा लेके निकल पड़े थे। आप नाच रहे थे। क्या आपकी सारी संवेदनाएं खत्म हो चुकी हैं। आपकी भक्त थीं वो दोनों महिलाएं जो मंगलवार को आपकी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। आपने सोशल मीडिया के जरिए आह्वान कर दिया कि 6 तारीख को कावड़ यात्रा निकाली जाएगी जब व्यवस्थाएं नहीं थी तो आपने क्यों लाखों लोगों को बुला लिया? कम से कम 10 राज्यों के दो ढाई लाख लोग पहुंच गए। मंगलवार को भी अव्यवस्था थी। लोगों ने यह सोचा कि 6 तारीख को जाएंगे तो जगह नहीं मिलेगी और यह और लोग 5 तारीख से आ गए। लगभग 1 लाख लोग आए थे उसमें दो महिलाओं की मृत्यु भी हुई। लेकिन आप बुधवार को फिर सुबह 9:00 बजे जब आप अपने निवास से सीवन नदी से कावड़ भरने के लिए निकले। जो महिलाएं मंगलवार को मर गई थी उनके शव तक उनके घर नहीं पहुंच पाए थे और आप निकल पड़े कांवड़ लेकर। क्या आपको शर्म नहीं आई। प्रदीप मिश्रा जी से प्रशासन कह रहा है, सरकार कह रही है कि आप भीड़ मत बढ़ाइए, आप जबरदस्ती भीड़ बढ़ा रहे है। कावड़ यात्रा निकाल रहे हैं खूब निकालिए कांवड़ यात्रा लेकिन पहले उसकी व्यवस्था तो करिए। वहां जो लोग मर गए उनका जिम्मेदार कौन होगा। आपने तो डीजे बुला लिए मौत पर नाचने के लिए। आप शिव की बात करते हैं शिव तो कभी भी ऐसा नहीं चाहते कि उनके भक्त किसी कथाकार की अव्यवस्था का शिकार बने। बुधवार को उमस भरी गर्मी में चार पांच किमी की यात्रा में लोग भूखे प्यासे त्राहीत्राही होते रहे आपके लोग वहां पानी का धंधा करते नजर आए। क्या यही कथा सुनाते हैं आप। आप शिवकथा नहीं मौत की कथा रच रहे हैं पंडीतजी। मोहन सरकार को आप पर तो बाकायदा एफआईआर करवाना चाहिए। यह जिम्मेदारी उस व्यक्ति की है जो सोशल मीडिया पर आह्वान कर करके वहां बुलाता हैं जहां व्यवस्थाएं नहीं है। आखिर आप कुबरेश्वर धाम पर क्यों इतने लोगों को बुलाते हैं? आप यह सोच लीजिए कि पिछले दो साल में वहां सात आठ मौतें हुई थी और ये दो दिन में फिर चार मौतें हो गई। इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है? प्रशासन क्यों नहीं प्रदीप मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करता? गैर इरादन हत्या का केस प्रदीप मिश्रा पर दर्ज होना ही चाहिए। क्योंकि वहां जो घटनाएं हो रही हैं व्यवस्था नहीं है और यह सिर्फ पैसा इकट्ठा करने के लिए बुलाए जाते हैं। वरना प्रदीप मिश्रा की कथा तो लोग सोशल मीडिया के जरिए सुन लेते हैं। टीवी पर सुन लेते हैं, YouTube पे सुन लेते हैं। आप जानबूझ के बोलते हैं। इस तारीख को आइए, इस बार को आइए, इतना फल मिलेगा, जीवन के संकट दूर हो जाएंगे। यह टोटका, वो टोटका और लोग बेचारे परेशान हैं। अपने घर की परिस्थितियों से परेशान हैं। वो आपकी बातों में आते हैं। यह सीधी-सीधी धोखाधड़ी हो रही है। आपकी बातों में आके आपके धाम तक आते हैं और धाम पर कोई व्यवस्था नहीं। पानी पीने तक की व्यवस्था आपने नहीं की हुई है और लोग बेमौत मारे जा रहे हैं। यदि वाकई शासन प्रशासन और कानून नाम की कोई चीज है तो प्रदीप मिश्रा आपके खिलाफ एफआईआर होना चाहिए वरना आप माफी माफी मांगी है और दुख तो इस बात का भी था कि उन दो महिलाओं का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ और यह प्रदीप मिश्रा नाचते हुए थे नाच कर रहे थे नृत्य कर रहे थे। अब मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार को ऐसे कथावाचक पर सख्त कार्रवाई करना चाहिए। उज्जैन में एक घटना नहीं हो रही जहां महाकाल खुद बैठे हैं। दरअसल यह सस्ती लोकप्रियता और पैसे कमाने के लिए जानबूझ के भीड़ इकट्ठी कर रहे हैं उनसे चंदा ले रहे हैं व्यवस्था के नाम पर और व्यवस्था दे नहीं पा रहे हैं। एक रोटी खाने को नहीं मिल रही है। दो किलोमीटर की लाइन लगी थी रोटी के लिए एक रोटी के लिए। यह सब लोगों ने देखा है। जब कुबेरेश्वर धाम पे आप व्यवस्था नहीं कर पा रहे हो तो क्यों भीड़ को बुला रहे हो? क्यों लोगों की जान से खेल रहे हो? मध्य प्रदेश सरकार से निवेदन है कि आप कथावाचक मिश्रा पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं तो इंदौर भोपाल के लिए कोई सड़क बना दो। पिछले 48 घंटे करीब-करीब होने को आ गए। अभी तक रोड बंद है पूरा। ना इंदौर जा सकते हैं ना इंदौर से आ सकते हैं आप। यदि जाना आना है तो छोटे-छोटे गांव से बाईपास निकलना पड़ेगा। केवल इस एक आदमी की सनक के कारण दो दिन चार जानें चली गई सड़कें जाम हो गई वो अलग।

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