'Donald Trump को नहीं मिला नोबल शांति पुरस्कार', वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो विनर
ओस्लो।
डोनाल्ड ट्रंप को इस बार नोबल प्राइज नहीं मिलेगा।' ये दावा हम नहीं बल्कि कुछ विशेषज्ञ कर रहे थे । दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की कोशिश इस साल फिर से चर्चा का विषय बन गया था। हर साल यह अनुमान लगाया जाता है कि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसे मिलेगा। लेकिन इस बार मामला इसलिए दिलचस्प बन गया है क्योंकि इसे पाने की तलब पाले हुए अमेरिका राष्ट्रपति ऊट-पटांग दावे कर रहे थे। उनका नाम भी उस सूची में शामिल था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उनके जीतने की संभावना बहुत कम बताई थी। आज ट्रंप के अरमानों पर पानी फिर गया है। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो को शांति का नोबेल प्राइज मिला है। उन्होंने वेनेजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण बदलाव लाने के लिए उनके लगातार संघर्ष किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प बीते कई महीने से नोबेल की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन नोबेल कमेटी ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए नहीं चुना। नोबेल पुरस्कार समिति का कहना है कि वेनेजुएला में तानाशाही शासन के कारण राजनीतिक काम करना बहुत मुश्किल है। मचाडो ने सुमाते नामक संगठन की स्थापना की, जो लोकतंत्र की बेहतरी के लिए काम करता है। वे देश में मुफ्त और निष्पक्ष चुनावों की मांग करती रही हैं। विजेता को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपए), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट मिलेगा। पुरस्कार 10 दिसंबर को ओस्लो में दिए जाएंगे।
किस आधार पर मिलता है नोबेल?
नॉर्वे की नोबेल समिति आमतौर पर शांति की स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और संस्थागत सहयोग पर ध्यान केंद्रित करती है। समिति उन व्यक्तियों या संगठनों को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है है, जिन्होंने लंबे समय तक शांति को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किए हों। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का रिकॉर्ड इस दृष्टिकोण से कमजोर है, क्योंकि उन्होंने कई बार बहुपक्षीय संस्थाओं को नज़रअंदाज़ किया और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।

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