अग्नि अखाड़े में नर-पिशाचों संग तांडव
- कुंभ में 1 लाख ब्रह्मचारी बनाने का टारगेट
- डेढ़ करोड़ की डिफेंडर से चलते हैं संत
प्रयोगराज। कुंभ क्षेत्र के सेक्टर-20, काली मार्ग पर शंभु पंच अग्नि अखाड़े के शिविर हैं। पूरे शिविर में मुंडन कराए हुए सैकड़ों लोग नजर आ रहे हैं। ऐसा नजारा यहां हर दिन रहता है। अखाड़े के सचिव और महामंडलेश्वर संपूर्णानंद आसन पर बैठ मुस्कुराते हुए इन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं। मुझे देखते ही वे कहते हैं कि ये हमारे धर्म रक्षकों की फौज है। इस महाकुंभ में इनकी संख्या एक लाख से ज्यादा हो जाएगी। 1136 में बना ये अखाड़ा शैव संप्रदाय के दूसरे अखाड़ों से अलग है। शैव संप्रदाय के 7 अखाड़े हैं। ये सभी शिव के उपासक हैं। इनमें 6 अखाड़े नागा संन्यासी और सातवां यानी अग्नि अखाड़ा ब्रह्मचारियों का है। यहां न तो कोई अपना पिंडदान करता है और न ही कोई नागा बनता है। यहां नागा और साधु की जगह ब्रह्मचारी संत बनाए जाते हैं, जो कभी धूणा नहीं रमाते।

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