भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य  प्रदेश भारतीय जनता पार्टी सत्ता और संगठन  में कुछ बड़ा होने वाला है? आजकल भारतीय जनता  पार्टी के नेता बंद कमरों में मीटिंगों के दौर शुरू कर चुके हैं। कोई खाने पर बैठ  रहा है। कोई लंच पर बैठ रहा है। कोई एक  दूसरे से मिल रहा है। कोई कमरा बंद बैठ के कर रहा है। तो आखिर होने क्या वाला है? मैं मध्य प्रदेश भारतीय  जनता पार्टी में इस समय डिनर डिप्लोमेसी भी चल रही है और आपने देखा कि भोपाल,  इंदौर, सागर नेता लंबे समय बाद साथ में भोजन करते दिखाई दे रहे हैं। और बड़ी बात यह है कि कुछ उस भोजन का बहिष्कार भी कर  रहे हैं। कुछ उनसे दूरी बना रहे हैं। इंदौर में  भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता मोहन  कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री कैलाश  विजयवर्गीय ने स्थानीय नेताओं की एक लंच अपने घर पर रखा था उसमें से भी कई नेता कई विधायक गायब थे। उसके बाद दूसरा लंच रखा था मध्य प्रदेश में नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद राजपूत ने सागर में। सागर के जब प्रभारी मंत्री उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सागर के प्रवास पर गए थे तो वहां गोविंद राजपूत ने स्थानीय विधायकों का वहां जिला अध्यक्ष सांसद इन सबको अपने खाने पर बुलाया था। वहां भी गोपाल भार्गव नहीं थे। वहां भूपेंद्र सिंह जी नहीं थे। वहां पर  बृज बिहारी पटेरिया नहीं थे और बाकी सब लोग थे। दोनों जिला अध्यक्ष सब बैठे  थे वहां। एक और खबर इसमें सामने आ रही है कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता इस समय मध्य प्रदेश में मोहन कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद पटेल का जो निवास है वह भी राजनीतिक गतिविधियों का एक बड़ा स्थान बन गया है। वैसे तो प्रहलाद पटेल लगातार लोगों को अपने घर पे भोजन पे बुलाते रहते हैं। लोगों से मेलजोल करते हैं। उनका स्वभाव है। लेकिन पिछले 36 घंटे में उनके यहां दो भोज ऐसे हुए हैं जो चर्चा का विषय बन गए हैं। मंगलवार रात्रि में उनके यहां  मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपने संगठन महामंत्री यतानंद शर्मा के साथ  प्रहलाद पटेल के घर पहुंचे। प्रहलाद पटेल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और फिर  डिनर हुआ और उनकी पत्नी ने उनको ​​तिलक लगाकर  उनका स्वागत और अभिनंदन किया। बुधवार को फिर प्रहलाद पटेल के यहां मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के पुराने नेता जो लंबे समय तक संगठन महामंत्री रह चुके हैं माखन सिंह वो पहुंचे। उनका भी गर्मजसेशी से स्वागत हुआ। उनके साथ भी डिनर हुआ। तो यह भारतीय जनता पार्टी में जो डिनर डिप्लोमेसी चल  रही है, जो लंच के कार्यक्रम चल रहे हैं, कमरा बैठ के चल रही हैं। तो यह जो मंथन की प्रक्रिया चल रही है, अब देखना है कि इसमें से निकलता क्या है। तो अधिकांश लोगों का कहना है कि कुछ भी हो सकता है। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी में अभी  फिलहाल कुछ भी हो सकता है। मतलब है कि कैबिनेट में भी बदलाव हो सकता है। निगम मंडलों में नियुक्तियां हो सकती  हैं। स्थानीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्तियां हो सकती हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि जिलों में कार्यकारिणी बनी है, संगठन बनना है। जो संगठन की कार्यकारिणी गठित होनी है  क्योंकि अध्यक्ष बन चुके हैं और अध्यक्ष अकेले काम कर रहे हैं। नई कार्यकारिणी की जरूरत महसूस हो रही है। इसके अलावा मध्य  प्रदेश की कार्यकारिणी बननी है। तो, यह तमाम सारी जो प्रक्रिया है, ऐसा लगता है कि आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी  में बहुत कुछ होने वाला है। अभी यह खबर पक्की नहीं है, लेकिन लोग यह कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में संगठन महामंत्री भी बदले जा सकते हैं। हितानंद शर्मा का  कार्यकाल बहुत अच्छा और लंबा रहा है। अब उनके स्थान पर किसी दूसरे राज्य से संघ के प्रचारक को लाने की चर्चाएं हैं। अब इसमें कितना दम है आने वाला समय बताएगा।  फिलहाल ऐसा लगता है कि पार्टी के जो बड़े नेता हैं ऊपर से कुछ इशारा हुआ है पार्टी के सीनियर नेताओं को कि आप आपस में बैठना शुरू करें मेलजोल बढ़ाएं भोजन पर बैठे डिनर पर बैठे तो मुझे लगता है कि वह सारी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके बहाने से लोग अपने मतभेद भी दूर कर रहे हैं। लेकिन कल जो कुछ हुआ उस पर भी मैं चर्चा करना चाहता हूं। दरअसल भारतीय जनता पार्टी में सबसे ज्यादा राजनीति यदि कहीं हो रही है तो वह सागर में हो रही है। सागर में आठ विधायक हैं। इसमें सात भारतीय जनता पार्टी के बैनर पर जीते हैं और एक कांग्रेस के जो कांग्रेस के बैनर पर बीना से जीती हैं। निर्मला सप्रे वह भी फिलहाल भारतीय जनता पार्टी में आ चुकी हैं। हालांकि वो दरवाजे पर खड़ी हैं। अंदर एंट्री नहीं हुई है कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा दोबारा चुनाव लड़ना पड़ेगा और यह भारतीय जनता पार्टी के आपस में जो विधायक हैं, वह आपस में गुत्थमगुत्था हैं। एक  दूसरे की शक्ल देखना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। कईयों की दुश्मनी विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया है। अब कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए तो इस बात से भी इंकार नहीं कियाजा सकता। आपने देखा जो राजू शुक्ला के  सम्मान में गोविंद राजपूत ने अपने घर पे भोज दिया था। तो कई नेताओं ने दूरी बनाई। तीन विधायकों ने दूरी बनाई। सोचने वाली बात यह है कि अलग-अलग गुठों में मतलब सागर के नेता मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं। लेकिन अलग-अलग गुटों में मिल रहे हैं। पहले  मिलने गए गोविंद राजपूत , शैलेंद्र जैन, प्रदीप लारिया, वीरेंद्र लंबदार, सांसद लता वानखेड़े यह सब लोग पहले मिले और उसमें निर्मला सप्रे भी थी। यह मुख्यमंत्री से मिले। सागर के बारे में बात की और मुख्यमंत्री ने संकेतों में कहा है कि बीना में चुनाव होते हैं तो आप लोगों की क्या भूमिका रहेगी? बीना उपचुनाव होते हैं तो क्या किया जाए? इसकी रणनीति बनाने के लिए जो लोग गए थे उनमेंगोविंद राजपूत गए थे। निर्मला सप्रे थी। प्रदीप लारिया थे। शैलेंद्र जैन साहब और लता वानखेड़े थी। यह लोग मुख्यमंत्री से अकेले में मिले। अब खबर आ रही है कि कुछ देर बाद दो नेता और अलग-अलग मिले। एक मिले देवरी के विधायक बृज बिहारी पटेरिया और दूसरे रहली के दिग्गज नेता विधायक गोपाल भार्गव  यह अलग मिले। तो यह क्या हो रहा है। क्या गोपाल भार्गव अलग मिल रहे हैं। बृज बिहारी पटेरिया अलग मिल रहे हैं। बाकी सब एक साथ मिल रहे हैं। भूपेंद्र सिंह मिल ही नहीं रहे। तो अब खबर यह भी है कि बिना चुनाव की तैयारियां शायद सत्ता और संगठन  स्तर पर शुरू हो चुकी हैं और मुख्यमंत्री पर एक दबाव है। अभी यह सारे नेताओं ने मुख्यमंत्री से कहा है कि यदि बीना जीतना है तो बीना को जिला बनाना पड़ेगा। तो इस  पार्टी ने शायद विचार शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने भी विचार शुरू किया है कि यह बात तय है कि यदि बीना जिला बना दिया तो भारतीय जनता पार्टी को वहां कोई नहीं हरा पाएगा। भारतीय जनता पार्टी जिसको टिकट देगी वह जीत जाएगा। लेकिन जिला नहीं बना और यदि टिकट निर्मला सप्रे को मिली तो भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानी हो सकती है। यह वहां चर्चा है।