भोपाल। 
मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग को ऐसे स्कूल बंद करने थे, जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 या उससे कम है। नियम यह था कि इन विद्यार्थियों को पास के स्कूल में मर्ज कर दिया जाए और वहां पदस्थ शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाए, जहां स्टाफ की कमी है। लेकिन प्रक्रिया रुक गई। वजह- इन स्कूलों में नेताओं, अफसरों और शिक्षक संघ पदाधिकारियों के रिश्तेदार पदस्थ हैं। इसी रसूख के चलते हर साल मर्जर टल जाता है। इस साल भी यही हो रहा है। प्रदेश के 17 जिलों में ऐसे 4608 स्कूल हैं। कायदे से इन्हें एक साल पहले बंद कर देना चाहिए था, लेकिन यह अब भी चल रहे हैं।सागर संभाग से लेकर नर्मदापुरम तक ऐसे कई उदाहरण हैं। दमोह के झलौन प्राथमिक स्कूल में केवल एक विद्यार्थी है, लेकिन यहां दो शिक्षक पदस्थ हैं। यदि सभी 4608 स्कूल बंद कर दिए जाएं तो 5000 शिक्षक उन स्कूलों में भेजे जा सकते हैं, जहां कमी है। 
रसूख ऐसा कि 5 बच्चों के लिए 2 शिक्षक तैनात

1. सागर : भाजपा नेता की भतीजी और पूर्व जनपद उपाध्यक्ष के रिश्तेदार पदस्थ... गांधी मुहाल पटकुई प्राथमिक शाला में 5 विद्यार्थी हैं और 2 शिक्षक। इनमें से एक अर्चना तिवारी, भाजपा नेता विनोद गुरु की भतीजी हैं। देवरी की प्राथमिक शाला टिकरिया में पदस्थ राजेंद्र यादव, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष राजधर यादव के रिश्तेदार और पूर्व मंत्री हर्ष यादव के करीबी हैं। इसलिए ये स्कूल बंद नहीं हुए।
2. दमोह : शिक्षक पदस्थ दिखाकर आयोग अध्यक्ष के पीए का काम... हटा ब्लॉक के झामरपांडे प्राथमिक स्कूल में 19 विद्यार्थी हैं। नियम के मुताबिक इसे बंद होना था, लेकिन यहां पदस्थ सुरेश पटेल वास्तव में पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमारिया के पीए का काम कर रहे हैं।
3. छतरपुर : पूर्व पालिका अध्यक्ष की बहन... वीरपुरा प्राथमिक स्कूल (19 विद्यार्थी) में 3 शिक्षक पदस्थ हैं। इनमें शालिनी सक्सेना, नौगांव के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अंजुल सक्सेना की बहन हैं। परा चौकी स्कूल (18 विद्यार्थी) में पदस्थ सरोज लिटौरिया, बिजावर विधायक राजेश शुक्ला की करीबी हैं।
4. टीकमगढ़ : डीपीसी की बहन... नयागांव आदिवासी बस्ती स्कूल में 20 विद्यार्थी और 2 शिक्षक। लक्ष्मी पांडे, खुद डीपीसी पीआर त्रिपाठी की बहन हैं।
5. रायसेन : शिक्षक संघ पदाधिकारी होने से बचा मर्जर... बिरौली प्राथमिक शाला (15 विद्यार्थी) को मर्ज होना था, लेकिन यहां पदस्थ राजकुमार धाकड़, आजाद अध्यापक संघ के जिला सचिव हैं। इसलिए कार्रवाई रुक गई।
मर्जर की प्रक्रिया चल रही है
प्रदेश में 20 से कम छात्र संख्या वाले सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जाना है। प्रक्रिया चल रही है। यदि कहीं प्रभावशाली शिक्षक ऐसा नहीं होने दे रहे हैं तो इसकी जांच करा लेंगे।
-संजय गोयल, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग