कटनी, सबकी खबर। 
भारीभरकम जुर्माने से बौखलाए और लगातार हो रही फजीहतों से सूबे के एक अरबपति विधायक के साथ साथ उनके कार्यकर्ताओं में भी भारी हताशा देखी जा रही है। दरअसल कटनी के विजयराघौगढ़ के अरबपति विधायक इतने अरबपति की सीधे न्यायलपालिका तक प्रभावित करने की हिमाकत कर डाली थी। जिसे लेकर पाठक काफी सुर्खियों में भी रहे थे। लेकिन अब पाठक के साथ साथ उनके कार्यकर्ताओं की एक पूरी फौज सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गई हैं मप्र के यशस्वी मुख्यमंत्री की सीधे घेराबंद की जा रही हैं। अब पाठक की यह फौज अपने ही सरकार के खिलाफ हमलावर हो गई हैं। उनके तमाम समर्थकों ने अब सोशल मीडिया पे सरकार के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया है। क्योंकि जो लिखा जा रहा है उसे पढ़ के लगता है कि पाठक ने अपने तमाम समर्थकों को सोशल मीडिया पर एक्टिव कर दिया है और यह जो कुछ लिखा जा रहा है जो कुछ बोला जा रहा है जो वीडियो वायरल किए जा रहे हैं उसमें यह कहा जा रहा है कि संजय पाठक की छवि सुनियोजित तरीके से खराब की जा रही है। संजय पाठक बेदाग हैं। संजय पाठक गरीबों के मसीहा हैं। संजय पाठक ने कोई गलती नहीं की है। तो यहां सवाल यह उठता हैं कि तो क्या गलत सूबे के मुख्यमंत्री है जिन्होंने विधानसभा मेें  पाठक पर जूर्माने की बात कही थी। तो क्या गलत न्यायलपालिका हैे जिसने सहारा मामले में संजय के परिजनों को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की थी। दूसरी अहम बात यह भी है कि यह जो कार्रवाई एक्सेस माइनिंग की हो रही हैं यह संजय पाठक की सरकार ही कर रही हैं वह खुद भाजपा सरकार में एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं विधायक है। संजय पाठक के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने यदि सहारा के खिलाफ एफआईआर की है जिससे संजय पाठक के करोड़ों का नुकसान हो रहा है तो ईओडब्ल्यू कोई मीडिया के अंडर में काम नहीं करता। ईओडब्ल्यू विपक्ष के नेताओं के अंडर में काम नहीं करता। ईओडब्ल्यू कानून से चलता है और यदि वह किसी के अधीन है तो वह मुख्यमंत्री के अधीन है। वह मुख्यमंत्री से निर्देश प्राप्त करते हैं। उनका जो विभाग है वह मुख्यमंत्री के अधीन है। मुख्यमंत्री के निर्देश मिले होंगे। 
सहारा मामले में भी हुआ भारी नुकसान... अभी बहुत कुछ होना है
सहारा के मामले में जो कारवाई संजय पाठक के कंपनियों पर हुई है। हालांकि ईओब्ल्यू ने अभी जो कारवाई की है वह सहारा के खिलाफ की है ना कि संजय पाठक की कंपनियों के खिलाफ की है। लेकिन इसमें संजय पाठक की बड़ा नुकसान हो गया। 1000 करोड़ की जमीन 90 करोड़ में खरीदी थी। 910 करोड़ का नुकसान तो यही हो गया एफआईआर के बाद। रजिस्ट्रियां कैंसिल होने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ईडी तैयार बैठी है आने के लिए। इससे संजय पाठक जी बौखला गए हैं। 
अपने ही सरकार की घेराबंदी करवा रहे हैं ​पाठक जी
उन्होंने जो सोशल मीडिया में अपने कथित समर्थकों की फौज खड़ी कर दी हैं यह उनको समझना चाहिए कि यह सारी कार्रवाई सूबे के मुखिया के अधीन ही होती है। खनिज विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है। मुख्यमंत्री मंत्री हैं उस विभाग के। उन्होंने इस टीम का गठन किया। उनके निर्देश पर हुआ है और उस टीम ने पाया कि आपने 443 करोड़ की एक्सेस माइनिंग की है। तो आप इसका जो विरोध कर रहे हैं तो क्या मुख्यमंत्री का विरोध नहीं है? यह क्या आपकी सरकार का विरोध नहीं है? कारवाई तो आपकी सरकार कर रही है। मी​डिया का काम हैं खबर दिखाना जो हम आगे भी दिखाएंगे आप गलत करोगे हम उसे प्रकाशित भी करेंगे और प्रकाश में भी लाएंगे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जिम्मेदारियों को निर्वहन हम नीडरता के साथ करते है और आगे भी करते रहेंगे। मीडिया समाज का दर्पण है। समाज में जो घटित हो रहा है वो हम दिखाते हैं। अब यदि संजय पाठक की कोई शिकायत ईओब्ल्यू में हुई ईओब्ल्यू ने एफआईआर कर ली तो हम क्या खबर नहीं चलाएंगे? यदि संजय पाठक की एक्सिस माइनिंग की शिकायत हुई उस पर एक्सिस माइनिंग में मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर टीम बनी और टीम ने यह पाया कि यह चोरी है। इसे चोरी की है तो क्या हम खबर नहीं चलाएंगे? हम चलाएंगे भी और दिखाएंंगे भी और हां पाठक जी आपको बताते चले हम बिना साक्ष्यों के कोई खबर नहीं चलाते हैं सबकी खबर के पास जितने कागज हैं उतने तो आपके पास जवाब भी नहीं होंगे। आज के नहीं हैं दो दशकों पुराने भी दस्तावेज हैं साक्ष्य हैं आपकी माताजी महापौर कैसे बनीं। क्या स्थिति और परिस्थिति उस समय थी। इसके कागज भी चौथे स्तंभ के ​दरिचों से आज भी झांक रहे हैं। 
मप्र सरकार के बाद भारत सरकार को देने हैं जवाब ​मिस्टर पाठक 
अभी पाठक जी सूबे के मुख्यमंत्री की कार्रवाईयां हो रही है आगे चलकर इन मामलोें में भारत सरकार हस्तक्षेप करेगा भारत सरकार ने एक आयोग बनाया हुआ है। अनुसूचित जनजाति आयोग वो भारत सरकार के अधीन कह सकते हैं आप उसे। उस आयोग ने नोटिस जारी किया है पांच कलेक्टरों को और यह संजय पाठक ने जो अपने गरीब आदिवासियों के नाम से 1173 एकड़ जमीन खरीद रखी है आदिवासियों की। उसका एक बड़ा मामला, बड़ा विस्फोट बहुत जल्दी होने वाला है। पांच कलेक्टरों से उन्होंने रिपोर्ट मांगी है और आयोग ने कहा है कि यदि यह रिपोर्ट आपने टाइम से नहीं भेजी तो हम सम्मन जारी करके कलेक्टरों को बुलाएंगे। सिविल कोर्ट की कारवाई होगी उनके खिलाफ। पाठक जी आप और आपके समर्थकों की जो कथित फौज आप मुख्यमंंत्री के खिलाफ उपयोग में ले रहे हैं उस ताकत को संभाल कर रखिए अभी तो और बहुत कुछ सामने आने वाला है। आगे आगे देखिए होता है क्या।