कटनी। 
हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा को सीधे फोन करने और अपने एक नजदीकी रिश्तेदार के माध्यम से अप्रोच करने के मामले में विधायक संजय पाठक के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस चल सकता है। पाठक के वकील अंशुमान सिंह ने भी केस लड़ने से इनकार कर दिया है। पाठक की इस हरकत के बाद वकीलों का एक धड़ा उनसे नाराज बताया जा रहा है। बता दें कि जस्टिस विशाल मिश्रा ने 1 सितंबर को अपने आदेश में लिखा था कि बीजेपी विधायक ने उन्हें फोन कर प्रभावित करने की कोशिश की, इसलिए वे खुद को केस से अलग कर रहे हैं। ये याचिका पाठक के परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों पर 443 करोड़ रुपए की पेनाल्टी से जुड़ी है। हालांकि, पाठक इस पूरे मामले में अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। 
जस्टिस मिश्रा के आदेश के बाद एडवोकेट ने भी केस छोड़ा
संजय पाठक जिन कंपनियों से जुड़े हैं, उनका केस वकील के तौर पर अंशुमान सिंह लड़ रहे थे। 1 सितंबर को जस्टिस विशाल मिश्रा के इस केस से हटने के बाद अंशुमान सिंह ने भी पाठक के परिवार की कंपनियों की पैरवी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कोर्ट में इसके लिए एप्लिकेशन दी है। उनका तर्क है कि जब उन्हें ये पता चला कि उनके क्लाइंट ने हाईकोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की, तो ऐसे में उन्होंने इस केस से खुद को दूर करने का फैसला कर लिया है। दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए पाठक के एडवोकेट अंशुमान सिंह ने कहा- यदि कोई वकील खुद को किसी केस से अलग करता है तो उसे हाईकोर्ट में लिखित एप्लिकेशन देना पड़ती है। वही मैंने दी है।
एडवोकेट बोले- पाठक से कोई बात नहीं होती
एडवोकेट अंशुमान सिंह ने बताया- एप्लिकेशन में मैंने लिखा कि आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन और निर्मला मिनरल्स, जिन दो कंपनियों के केस की मैं पैरवी कर रहा था, उनके किसी रिलेटिव ने जस्टिस मिश्रा को कॉल किया। इस बात का जस्टिस मिश्रा ने 1 सितंबर के आदेश में जिक्र किया। इसकी वजह से मैं ये केस छोड़ रहा हूं और मैंने इस बारे में अपने क्लाइंट को बता दिया है। एडवोकेट अंशुमान सिंह ने ये भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि जिन दो कंपनियों की वो पैरवी कर रहे थे, उसमें विधायक संजय पाठक का कितना शेयर है? उनका संजय पाठक से सीधा सरोकार नहीं है। वो कई सारी कंपनियों के केस लड़ते हैं, ऐसे में हर केस के क्लाइंट का किससे क्या रिलेशन है, इस बात की जांच नहीं करेंगे।