आपके संजय पाठक से 2000 करोड़ की वसूली अभी बाकी हैं सीएम साहब
कटनी माइनिंग कॉन्क्लेव से पहले बड़ा खुलासा: युवा कांग्रेस अध्यक्ष दिव्यांशू मिश्रा ने मांगा सीएम से मिलने का समय
कटनी।
माइनिंग कॉन्क्लेव से ठीक एक दिन पहले कटनी की राजनीति में भूचाल ला देने वाला पत्र सामने आया है। युवा कांग्रेस कटनी के अध्यक्ष दिव्यांशू मिश्रा ‘अंशू’ ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने का समय मांगा है। श्री मिश्रा ने पत्र में दावा किया है कि प्रदेश सरकार के खजाने में करीब 2000 करोड़ रुपये की वसूली विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों से होनी बाकी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि नियमों का उल्लंघन करते हुए जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट द्वारा वर्षों से अत्यधिक उत्पादन किया गया, लेकिन तय समयावधि में राशि जमा नहीं की गई।
विधानसभा में उठ चुका है मामला
युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में विधानसभा प्रश्न क्रमांक 2309 का हवाला देते हुए लिखा कि 5 अगस्त 2025 को खुद मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया था कि इन कंपनियों पर 443 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली शेष है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार यह राशि 31 दिसंबर 2017 तक जमा हो जानी चाहिए थी। पत्र में कहा गया है कि न सिर्फ मूल राशि बल्कि उस पर जीएसटी, ब्याज और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 2000 करोड़ तक पहुंच चुका है। दिव्यांशू मिश्रा ने दावा किया कि यदि यह वसूली हो जाए तो प्रदेश के राजस्व को जबरदस्त मजबूती मिलेगी और "विकसित मध्यप्रदेश" का सपना और करीब होगा।
अवैध रेत खनन का भी जिक्र
अंशु मिश्रा ने पत्र में कटनी और उमरिया जिलों में हुए अवैध रेत उत्खनन का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि इस अवैध कारोबार का पूरा प्रमाण उनके पास पेन ड्राइव में उपलब्ध है, जिसे वे मुख्यमंत्री को सौंपना चाहते हैं। पत्र के माध्यम से युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि वे 23 अगस्त को कटनी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री से भेंट कर यह दस्तावेज सौंपना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ कुछ माइनिंग एक्सपर्ट्स की टीम भी रहेगी, जो मुख्यमंत्री को विस्तार से जानकारी देगी।
राजनीतिक हलचल तेज
इस पत्र के सामने आने के बाद कटनी की सियासत में हलचल तेज हो गई है। माइनिंग कॉन्क्लेव से पहले 2000 करोड़ की वसूली का मुद्दा उछलने से कॉन्क्लेव की चर्चाओं पर नया रंग चढ़ गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री मिश्रा से मुलाकात कर उनकी बात सुनेंगे और क्या सचमुच खजाने में हजारों करोड़ की राशि जुड़ पाएगी?

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