जबलपुर ।
 भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज के मामले में मचे धमाल के बाद अब जबलपुर में हाल ही में लोकार्पण किए गए मध्य प्रदेश का सबसे लंबे फ्लाईओवर ब्रिज भी विवादों से घिर गया है. फ्लाईओवर के निर्माण में कई कमियां बताकर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई है. इस मामले में एक सुनवाई हो चुकी है. याचिका में उठाए गए सवालों पर हाई कोर्ट ने जवाब पेश करने को कहा है. अब इस मामले की सुनवाई 22 सितंबर होगी.
याचिका में बताया- ओवरब्रिज में कई एक्सीडेंटल प्वाइंट
जबलपुर के फ्लाईओवर ब्रिज की कमियों को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है "इस ब्रिज की वजह से कई लोगों की निजता खतरे में है. इसके साथ ही ब्रिज में कई एक्सीडेंटल पॉइंट हैं, जिन्हें खत्म किया जाना चाहिए." मध्य प्रदेश के सबसे लंबा फ्लाईओवर की लंबाई लगभग 7 किलोमीटर है. इसके निर्माण में लगभग ₹1200 करोड़ रुपए का खर्च आया है. बीते दिनों बड़े धूमधाम से मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और केंद्रीय परिवहन मंत्री की मौजूदगी में इसका लोकार्पण हुआ था.
ब्रिज के ऊपर व्यू कटर लगना चाहिए
एडवोकेट आदित्य सांघी ने बताया "यह ब्रिज शहर की घनी आबादी के बीच से होकर गुजर रहा है और ब्रिज के ऊपर से आसपास में रहने वाले लोगों के घरों के अंदरूनी हिस्से भी दिखाते हैं. ऐसी स्थिति में आसपास रहने वाले लोगों की निजता खतरे में है. इसलिए पूरे ब्रिज के ऊपर एक व्यू कटर लगाया जाना चाहिए ताकि ब्रिज के ऊपर से कोई आसपास में रहने वाले लोगों के घरों को ना देख सके. साथ ही ब्रिज के ऊपर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए."
इतने लंबे ब्रिज पर ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था नहीं
याचिका में मांग की गई "ब्रिज के ऊपर यातायात पुलिस की कोई व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि एक्सीडेंट के खतरे को कम किया जा सके. क्योंकि लोग ब्रिज के ऊपर 100 की स्पीड में भी गाड़ियां चल रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है. इसके साथ ही ब्रिज के दो लूप जो राइट टाउन में और नेपियर टाउन में उतारे गए हैं, उनमें यू-टर्न नहीं बनाया गया है. ये सीधे सड़क पर उतरने की वजह से एक्सीडेंट के खतरे बने हुए हैं."