जबलपुर। 
जबलपुर की शिवराज बस्ती में इन दिनों लगे पोस्टर लोगों को चौंका रहे हैं। यहां के निवासियों ने अपने घर के बाहर जो पोस्टर चिपकाए हैं, उन पर लिखा है- यह मकान बेचना है। ये पोस्टर कुछ अनजान लोगों के यहां बस जाने के कारण लगाए गए हैं। कोई इन्हें रोहिंग्या तो कोई रैकी करने वाले संदिग्ध बता रहा है। मकान बेचने के इन पोस्टरों के बारे में जब शहर के हिंदूवादी संगठनों को जानकारी मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। इन संगठनों के कार्यकर्ता बस्ती में पहुंचे तो पता चला कि अचानक ही कुछ लोग यहां आकर बस गए हैं। ये संभवत: बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं। इसके बाद पुलिस ने यहां पहुंचकर जांच की। जानकारी मिली कि करीब 10 से ज्यादा परिवारों के 50 लोग यहां झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। यहां गंदगी भी फैला रहे थे, जिसके चलते लोग अपने मकान बेचने को मजबूर हो गए हैं।
कमरे किराए पर लेकर रहने लगे हैं
नर्मदा किनारे बसी शिवराज बस्ती में सब कुछ सामान्य चल रहा था। करीब तीन सप्ताह पहले बस्ती में पोस्टर लगना शुरू हो गए कि मकान बेचना है। कुछ लोग घरों मे ताले लगाकर कहीं और रहने चले गए। हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि बीते कुछ समय में धीरे-धीरे यहां पर 50 से अधिक लोग आकर बस गए हैं। ये यहां मांस के टुकड़े भी फेंक रहे हैं। कुछ लोगों ने बस्ती में झोपड़ी बना ली, तो कुछ ने किराए पर कमरे ले लिए। स्थानीय रहवासियों ने बताया कि अचानक यहां आकर बसे ये लोग दिनभर भीख मांगते हैं। रैकी करते हैं कि कौन सा घर खाली है, कहां ताला लगा हुआ है, जिससे कि वहां पर चोरी की जा सके। कुछ लोगों ने जब इनके यहां रहने का विरोध किया तो ये गाली-गलौज करते हुए महिलाओं को अर्धनग्न होकर खड़ा कर देते हैं।
पहले एक झोपड़ी बनी, फिर बढ़ती गई संख्या
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ महीने पहले बस्ती में सिर्फ एक झोपड़ी बनी थी, फिर धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। इनमें से कुछ लोग किराए का कमरा लेकर रह रहे थे। लोगों का कहना है कि यदि इनकी संख्या बढ़ती गई तो इन्हें हटाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। बजरंग दल के प्रचारक रमेश तिवारी ने कहा- शिवराज बस्ती के मुख्य मार्ग पर इन लोगों ने इतनी गंदगी फैला दी है कि निकलना मुश्किल हो गया है। 10-20 कुत्ते पाल रखे हैं, जिनसे हमेशा डर बना रहता है। हम किसी को जबरन यहां से बेघर नहीं कर रहे हैं, पर जो लोग गंदगी फैलाते हैं, बिना दस्तावेजों के रहते हैं, उनको यहां रहने नहीं दिया जाएगा। पुलिस-प्रशासन को यह भी जांच करना होगा कि आखिर जो लोग यहां रह रहे हैं, क्या उनके आधार कार्ड बने हैं, अगर हैं तो कहां और कैसे बन गए।