कलेक्टर की लापरवाही से 1 साल जेल में रहा शख्स, गलत NSA लगाने पर 2 लाख का जुर्माना
जबलपुर।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के मामले में लापरवाही बरतने पर हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर पर 2 लाख रु की कॉस्ट लगाई है. कलेक्टर की गलती की वजह से एक शख्स पर जबरन NSA लगाकर जेल भेज दिया गया और उसे 1 साल 2 महीने जेल में बिताने पड़े. मामला जब कोर्ट पहुंच तो खुलासा हुआ कि एसपी द्वारा किसी अन्य अपराधी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा गया था पर कलेक्टर की चूक से किसी और पर कार्रवाई हो गई.
कलेक्टर की गलती की वजह से 1 साल जेल में बिताए
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब शहडोल निवासी किसान हीरामनी बैस ने अपने बेटे के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि एनएसए की कार्रवाई किसी नीरजकांत नाम के व्यक्ति पर होनी थी पर कलेक्टर के आदेश में उनके बेटे का नाम डालकर जेल भेज दिया गया. याचिका में कहा गया कि उनके बेटे सुशांत पर एनएसए की कार्रवाई का आदेश बिना किसी स्वतंत्र गवाह के बयानों के पारित कर दिया गया. कोर्ट में यह भी बताया गया कि गलत तरीके से की गई एनएसए की कार्रवाई से याचिकाकर्ता के बेटे को 1 साल 2 महीने जबरने जेल में बिताने पड़े जबकि उसकी गिरफ्तारी से कुछ समय पहले ही शादी हुई थी.
कलेक्टर ने कोर्ट में दिया ये तर्क
याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर शहडोल केदार सिंह व पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब किया था. कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने पारित आदेश के अंतिम पृष्ठ में याचिकाकर्ता के पुत्र के नाम का उल्लेख किए जाने की गलती स्वीकार की. उनका तर्क था कि नीरजकांत द्विवेदी और सुशांत बैस के मामलों की सुनवाई एक साथ की गई थी. इसी के चलते ये त्रुटि हुई है और इस तथ्यात्मक गलती के अलावा आदेश पारित करने में कोई अन्य त्रुटि नहीं हुई है.
हाईकोर्ट ने गृह विभाग से मांगा था जवाब
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि एनएसए की कार्रवाई के संबंध में पारित आदेश को पुष्ठि के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाता है. अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग ने भी अपने विवेक का उपयोग किए बिना कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को मंजूरी प्रदान कर दी. आदेश को पढ़ने की जहमत तक नहीं उठाई गई. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिला कलेक्टर द्वारा एनएसए की कार्रवाई के अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजी गई फाइल प्रस्तुत हाईकोर्ट में प्रस्तुत करें, लेकिन फाइल नहीं भेजी गई तो कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करनी थी. इसपर अतिरिक्त मुक्य सचिव की ओर से पेश जवाब में कहा गया कि एनएसए के लिए फाइल भेजी गई थी लेकिन इसमें टाइपिंग एरर के कारण याचिकाकर्ता का नाम आ गया, इस संबंध में क्लर्क को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
कलेक्टर पर 2 लाख की कॉस्ट
तमाम तथ्यों को सुनने के बाद युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि एनएसए का उपयोग टूल की तरह नहीं किया जा सकता है. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है. एनएसए की कार्रवाई तभी की जाती है जब व्यक्ति से समाज व लोगों में भय की स्थिति उत्पन्न होती है. युगलपीठ ने कलेक्टर पर दो लाख रु की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाते हुए यह राशि याचिकाकर्ता के पुत्र के खाते में जमा करने के आदेश जारी किए हैं.

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