भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हेमंत  खंडेलवाल को अब 36 दिन पूरे हो गए हैं।  लंबे समय बाद मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को एक  क्रियाशील अध्यक्ष मिला। मध्य प्रदेश की 9 करोड़ जनता की नजर है। भारतीय जनता पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की तो नजर है ही है लेकिन आम जनता की भी नजर है। उनके सोशल मीडिया अकाउंट को देखने पर पता चलता हैं कि 36 दिन हेमंत खंडेलवाल की जो गतिविधियां हुई हैं उससे तो यह प्रतीत होता हैं कि हेमंत खंडेलवाल के अंदर  एक दर्द दिखाई दे रहा है। इन 36 दिनों में और वो दर्द वो है कि जो पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इस पार्टी को खड़ा किया और जिन पार्टी  पार्टी के पुराने लोगों को घर बिठा दिया  गया है। हेमंत खंडेलवाल उनके घर जा रहे  हैं। एकदम से जागृत कर रहे हैं।  मपुराने नेताओं को  सम्मान  देने की जो एक परंपरा शुरू हुई है इसे बडे ही अदृभुत अंदाज से जनता और कार्यकर्ता देख रहे है। पार्टी ने जिन नेताओ को विसरा दिया था। पूरी तरह से कोई  पूछ परख नहीं हो रही थी। ना उनकी चुनाव में ड्यूटियां लगाई गई। ना उन्हें पूछा गया। आप चाहे विक्रम वर्मा की बात कर लें, कृष्ण मुरारी मोेघे की बात कर लें, भोपाल में उमाशंकर की बात कर लें, गौरी शंकर सेजवार, ग्वालियर में आप चले जय सिंह पवैया हो या अनूप मिश्रा हो, ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने इस पार्टी को बहुत कुछ दिया। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में जिस तरह से इनकी उपेक्षा हुई उसके बाद अब जो हेमंत खंडलवाल  का कार्यकाल शुरू हुआ है जिसे  वे पुराने और नए लोगों का बेहतरीन समन्वय करके आगे बढ़ रहे हैं। 3 अगस्त को वे उनके सर पर ताज रखा गया। भारतीय जनता पार्टी में सामूहिक जिम्मेदारी का भाव रहता है। जिसे नवागत अध्यक्ष बड़े ही शालीन और विनम्रता के साथ पूरा कर रहे है। खंडेलवाल निवृतमान अध्यक्ष के घर पहुंचे वीडी शर्मा के उनका आभार व्यक्त किया और वहां से निकल के वो मुख्यमंत्री के यहां पहुंचे यानी उन्होंने सत्ता और संगठन को साधने की पहले दिन से ही कोशिश थी। अगले दिन वे उज्जैन निकल गए। वहां कार्यकर्ताओं से मिलते हुए गए महाकाल का आशीर्वाद लेकर आए और उसके बाद में जो पहला संभागीय दौरा था वो ग्वालियर का था। वहां वे वे लक्ष्मीबाई जी के स्टैचू पे भी गए। वे  कार्यकर्ताओं से भी मिले। वे अटल जी के घर भी गए। अटल जी के  भांजे अनूप मिश्रा के घर गए वे जयभान सिंह  पवैया के घर गए वे नरेंद्र सिंह तोमर के घर गए। ये तो सब बीजेपी के पुराने नेता हैं। लेकिन खास बात अभी कांग्रेस से आए उनमें से किसके घर गए तो वह प्रद्युमन सिंह तोमर के घर भी गए तो उन्होंने जिस तरह का एक समन्वय बिाने की कोशिश की वह एक कुशल संगठनिक नेतृत्व की और साफ इशारा कर रही है। उसके बाद वे जबलपुर  पहुंचे थे आपको जबलपुर में वे रविंद्रन सिंह जो  महाधिवक्ता रहे हैं उनकी पत्नी महापौर रही हैं। बीजेपी से राज्यसभा रहे हैं। यह  बीजेपी के पुराने नेता हैं रविंद्रन सिंह उनके घर गए। जेसी बनर्जी जो पूर्व सांसद हैं जो जेपी नड्डा साहब की सासू भी है उनके घर गए राकेश सिंह  के घर भी गए कि बुरा ना लगे और उन्होंने जिस तरह से तारतम्य बिठाया इंदौर में उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से बात की इंदौर गए भोपाल में उन्होंने जिस तरह से रवैया अपनाया  पूर्व नेता प्रतिपक्षोंसे भी मिलो और पूर्व मुख्यंत्रियों से भी  मिलो। तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा के घर  गए, शिवराज सिंह के घर गए, वे डॉ. गौरीशंकर सेजवार के घर गए, वे गोपाल भार्गव के घर गए। ये पहली किस्त में उन्होंने सब चीजों को जिस तरह से किया है। वे इस दौरान तीन चार बार बैतूल भी गए। वहां उन्होंने छोटे-छोटे कार्यकर्ता जिनका इस पार्टी को यदि थोड़ा  सा भी योगदान है और वे घर बैठे हैं तो वे  उनके घर जरूर गए तो ये सारी चीजें  उन्होंने की और इसी दौरान ऐसा नहीं है कि  केवल नेताओं से मिलने मिलाने में निकाला  उन्होंने समय वे संगठन को मजबूत करने औरसंगठन के लोगों से मिलने में भी लगे रहे।  उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई। जिला अध्यक्षों की बैठक बुलाई।उन्होंने मुख्यमंत्री से कह के मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेश पदाधिकारियों और जिला के प्रभारी मंत्रियों की बैठक कराई। उनके बीच में समन्वय की कोशिश की गई। तमाम सारे जो उनके प्रकोष्ठ है उनकी बैठकें की उन्होंने। उनकी जो सोशल मीडिया टीम है आईटी  टीम जिसको कहते हैं उन्हें ऑनलाइन आमंत्रित किया। उन्हें बुलाया। विधायक दल की बैठक की। गुरूवार को साध्वी प्रज्ञा ठाकुरसे मिले नरोत्तम मिश्रा से मिले पूरे दिन भर सक्रिय रहे। यहां एक और बात आपको बताते चले  विधानसभा में उन्होंने बाकायदा एकसामान्य विधायक की तरह प्रश्न पूछा उन्होंने कहा कि मेरे बेतूल में जल कार्य  जल नल योजनाओं में उपयुक्तंत्रियों के जो पद खाली है। उसके लिए क्या करेंगे? फिर सुझाव भी दिया। हालांकि विपक्ष के लोग  चिल्लाते रहे कि भाई सत्तारूढ़ पार्टी के  प्रदेश अध्यक्ष सवाल पूछ रहे तो उन्होंने  कहा एक विधायक के रूप में मुझे सवाल पूछने   का अधिकार है और अपने क्षेत्र के समस्याएं उठाने का अधिकार है। एक सामान्य विधायक भी बन गए। प्रदेश अध्यक्ष भी रहे और एक सबसे  बड़ी बात है कि उन्होंने जो ब्रिज का काम किया है, पुराने नेता घर बैठे हैं, नए नेता सक्रिय हैं। इन दोनों के बीच में जो ब्रिज बनाने का ब्रिज बनाने का काम किया है, एक पुल बनाने का काम किया है, तो निश्चित तौर पे हेमंत खंडेलवाल बहुत तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। उन्होंने हाल ही में प्रहलाद पटेल के घर से वहां भोजन किया।  अच्छा अधिकांश मुलाकातों में या तो मुख्यमंत्री उनके साथ हैं या हितानंद शर्मा उनके साथ हैं या ये दोनों उनके साथ  हैं। उन्होंने कोशिश की है कि सबको साथ  लेके चलें। एक बड़ी बात बड़ा प्रयास है। दिल्ली में उन्होंने जेपी नड्डा साहब से मुलाकात की। अमित शाह  से मुलाकात की। ज्योतिरादित्य सिंधिया के यहां वो दो बार होके आ चुके हैं। दुर्गादास उईके जो उनके खुद के सांसद हैं वहां से उनसे मुलाकात की। अह अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात की। किशन रेड्डी केंद्रीय मंत्री से मुलाकात की। एल मुरगन से मुलाकात की। राजनाथ सिंह से मुलाकात  की। प्रहलाद जोशी से मुलाकात की। शिवपाल सिंह जी शिव प्रकाश से भी वह पहली बार दिल्ली में ही मिले। तो ऐसे बहुत सारे काम उन्होंने किए हैं। जिला जिला अध्यक्षों की बैठक प्रदेश तो ये 36 दिन एक बहुत छोटा कार्यकाल है। आप धार्मिक स्थलों की यात्रा भी कर रहे हैं और बीच-बीच में वे बेतुल हो जाते हैं। बेतुल को छू के वापस आते हैं। लेकिन वे बेतूल में घर में नहीं बैठते क्योंकि घर में आराम करने नहीं जा रहे हैं। बेतुल में भी वे सुबह से निकल जाते हैं। कोई जरूरी नहीं कि उनको बड़ी कार चाहिए। वे स्कूटर से भी निकल सकते हैं। वे छोटी गाड़ी से भी आम आम कार्यकर्ता के घर पे उनकी सुबह चाय हो रही है। पिछले दिनों खूब खबरें वायरल हो रही थी  भारतीय जनता पार्टी ने अपने 50 से ज्यादा नेताओं को घर बिठा दिया है। कुछ लोग कहतेथे यह फूंके हुए बल्ब हैं। कुछ कहते लेकिन हेमंत खंडेलवाल ने यह सिद्ध कर दिया है कि ना यह घर बिठाए गए हैं ना फूंके हुए बल्ब हैं। हम इनका उपयोग करेंगे और उसकी ओर एक तरह से हाथ बढ़ा दिया है। यूं कहा जा सकता हैं कि कि इन फूके हुए बल्बों में भी बिजली देने का काम, करंट देने का काम हेमंत खंडेलवाल ने शुरू कर दिया है। बिलकुल मार्गदर्शन, अनुभव और जोश सबको एक साथ लेकर चलने की वो कोशिश कर रहे हैं। मीडिया के साथ भी अपने कार्यकलापों को साझा किया। मीडिया से बातें साझा की।  36 दिन में  किसी व्यक्ति का पूरा मूल्यांकन होना बहुत मुश्किल है। अभी वो नए-नए आए हैं। लेकिन उनकी शुरुआत बहुत अच्छी है।  हेमंत खंडेलवाल की मतलब उन्होंने क्या दिशा तय की है। उन्होंने सबको साथ लेके चलने का एक जो पार्टी का अध्यक्ष होता है वो उम्र में कुछ भी हो जूनियर सीनियर हो लेकिन उसकी भूमिका पिता की भूमिका रहती है। पूरे परिवार को बांध के रखने की भूमिका होती है। मुझे लगता है कि उस दिशा में हेमंत खंडेलवाल आगे बढ़ रहे हैं। बिल्कुल उन्होंने वो अपने जीवन में किस तरह से अपनाते हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व से भी समन्वय और स्थानीय नेताओं से भी समन्वय कार्यकर्ताओं से भी समन्वय और साफ-साफ संदेश कि भाई भतीजावाद नहीं चलेगा रिश्तेदारों के बारे में बहुत बातें मत करो और पुत्रों को संभालो इस तरह के भी निर्देश दाया बाया बहुत तरह की चीजें इतने कम समय में इंट्रोडक्शन उनका मीडिया से बहुत ज्यादा नहीं रहा है उनके बारे में बहुत ढेर सारी  चीजें लोग नहीं जानते थे लेकिन इतने कम समय में बहुत जबरदस्त ढंग से वह सबके सामने आई है उनकी चीजें वो जो करते हैं और जो वह कहते हैं। सबसे अच्छी बात यह है ये भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं के लिए खुशी की बात है जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध घर बैठा दिया गया है। जिन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए वो नहीं मिल पा रहा था। हेमंत खंडेलवाल  ने वो जो वो सम्मान लौटाने की दिशा में जो कदम बढ़ाया है। यह वास्तव में पार्टी के हित में है। यह कदम और आगे बढ़ेंगे  और पुराने नेताओं के अनुभव का लाभ यह पार्टी ज़रूर लेगी। हेमंत खंडेलवाल को आप कमजोर नहीं आंक सकते।  वो बनिए भी हैं और राजनीति उनके डीएनए में है। उनके पिता बेशक कितने भी भोलेभाले थे लेकिन राजनीति के दाव पेश खा गए थे। हेमंत खंडेलवाल को आप कमजोर नहीं कह सकते हैं।