हरदा।
हरदा जिले में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब सीधे तौर पर दिखाई देने लगा है। हड़ताल के चलते जिले में नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे अहम राजस्व कार्य रुक गए हैं। अब तक करीब 200 से ज्यादा मामले लंबित हो चुके हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कार्यालयों में सन्नाटा, लोग खाली हाथ लौटे
गुरुवार को तहसील कार्यालयों में पूरी तरह सन्नाटा छाया रहा। जो लोग अपने आवेदन लेकर पहुंचे थे, उन्हें कर्मचारियों ने साफ कह दिया कि अधिकारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद ही कोई कार्रवाई संभव है। इससे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
हड़ताल की जानकारी 4 अगस्त को ही सरकार को दे दी गई थी, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
राजस्व अधिकारियों के काम बांटने पर नाराजगी
हड़ताल का मुख्य कारण राज्य सरकार की वह योजना है जिसमें राजस्व अधिकारियों के कार्यों को न्यायिक और गैर-न्यायिक हिस्सों में बांटने की बात कही गई है। तहसीलदार राजेंद्र पंवार के मुताबिक, सरकार ने शुरुआत में इसे 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की बात कही थी, लेकिन बाद में इसे 9 अन्य जिलों में भी लागू कर दिया गया। इस फैसले का अधिकारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ उनके अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि कामकाज की प्रक्रिया भी गड़बड़ा जाएगी।
स्टाफ और संसाधनों का अभाव, न्यायालय भी जोड़े
अधिकारियों का आरोप है कि न तो उन्हें पर्याप्त स्टाफ मिला और न ही जरूरी संसाधन। ऊपर से, राजस्व न्यायालयों को एकसाथ जोड़ देने से कामकाज पूरी तरह बिगड़ गया है। 3 अगस्त को हुई गूगल मीट बैठक में प्रदेश के 45 जिलों के अधिकारियों ने निर्णय लिया कि जब तक यह योजना पूरी तरह वापस नहीं होती, तब तक वे कोई भी नियमित कार्य नहीं करेंगे।
हरदा में पूरी तरह ठप प्रशासनिक काम
फिलहाल हरदा जिले में सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर हैं। इससे जिले में राजस्व संबंधी तमाम कार्य ठप पड़े हुए हैं। लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।