मप्र के मंत्री को धुत्कार दिया मीसाबंदी ने, कहा- सम्मान की भूख नहीं न्याय दिलवाओ
भोपाल / दमोह।
दमोह शहर के तहसील मैदान में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार से दमोह के मीसाबंदी संतोष भारती ने सम्मान लेने से मना कर दिया और वह वापस चले गए। मंत्री के साथ मौजूद दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने भी भारती को काफी मनाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। भारती ने मंत्री परमार को एक आवेदन दिया और अपना गुस्सा भी जाहिर किया और बगैर सम्मान कराए वहां से चले गए। इस मामले में जब मंत्री परमार से संतोष भारती द्वारा सम्मान न कराने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों किया और उसके बाद चुप्पी साध ली। दूसरी ओर भारती से सम्मान न करवाने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा वह सम्मान के नहीं न्याय के भूखे हैं।
मैंने किसी मंच पर कभी सम्मान नहीं लिया
मीसाबंदी संतोष भारती ने कहा कि मैं वहां सम्मान लेने के लिए नहीं गया था। मैंने कभी किसी मंच पर जाकर सम्मान नहीं लिया। आज मेरे जाने का मकसद ज्ञापन देने जाना था, न्याय पाने गया था। मैं देश का पहला इकलौता ऐसा व्यक्ति हूं जो तीन बार मीसाबंदी रहकर जेल गया। 40 साल पहले मैंने हाउसिंग बोर्ड से जमीन खरीदी थी। मैंने पांच हजार की रिश्वत अधिकारी को नहीं दी तो आज तक उसकी रजिस्ट्री हाउसिंग बोर्ड नहीं कर रहा। मैं मध्य प्रदेश शासन से और हाई कोर्ट से केस जीता उसके बाद भी मेरी रजिस्ट्री नहीं हो रही। पहले कांग्रेस का शासन था तो लोग शासन बदलने की बात करते थे। अब 25 साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन मुझे आज भी न्याय नहीं मिल रहा है।
मैंने मंत्री को ज्ञापन दिया
उन्होंने कहा कि मैं सम्मान का भूखा नहीं हूं। राजनीति कोई धंधा नहीं है। हमारे पास रोजगार, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं होनी चाहिए नहीं तो यह सम्मान का मतलब पाखंड है। हम मूल्यों की राजनीति करते हैं। मंत्री की चुप्पी पर भारती ने कहा कि मैंने उनसे बात की थी और मैंने उन्हें ज्ञापन दिया। यदि वह कह रहे हैं कि मुझे कोई ज्ञापन नहीं दिया तो वह सफेद झूठ बोल रहे हैं।

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