भोपाल / धार 
मध्यप्रदेश में अफसर,इंजीनियर इनकी कारगुजारियां और भ्रष्टाचार के किस्से तो सरेआम हैं लेकिन आज हम बात करेंगे एक ऐसे कर्मचारी जो संविदा भर्ती हैं लेकिन विधायक और वरिष्ठ अफसरों पर पर भी उसका रूतबा भारी हैं। उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता हैं और नहीं बिगाड़ पा रहा हैं। मप्र अजब हैं गजब हैं यूं नहीं कहा जाता। दरअसल मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का एक संविदा कर्मचारी कितना ताकतवर हो चुका हैं इसका  अंदाज लगाना मुश्किल हो रहा है। विधायक इनके बारे में चिट्ठी  लिख चुके। विधानसभा में भी यह मामला आ गया। कलेक्टर ने कमिश्नर को पत्र लिख दिया कि  यह भ्रष्ट है। इसे हटा दिया जाए। लेकिन 7 साल से फाइल इधर से उधर हो रही है। लेकिन यह संविदा कर्मचारी टस से मस नहीं हो रहा है। ना विधानसभा बिगाड़ पाई, ना विधायक बिगाड़  पाए, ना कलेक्टर बिगाड़ पाए। आखिर कितना  ताकतवर है एक संविदा कर्मचारी। दरअसल इस कर्मचारी पर  दवा खरीदने में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।  इनका नाम हैं दिलीप पटेल। यह संविदा कर्मचारी ग्रेड टू हैं और यह पदस्थ हैं धार के स्वास्थ्य विभाग में और वहां इन्होंने जम के भ्रष्टाचार किया है। कलेक्टर लिख रहे हैं। विधानसभा में  बाकायदा जवाब आया हुआ है कि हां भ्रष्टाचार हुआ है। जो नियमित कर्मचारी हैं उनके खिलाफ कारवाई हो गई। लेकिन यह जो संविदा कर्मचारी है यह आज भी 7 साल बाद भी अपनी  कुर्सी पे यथावत बैठा हुआ है और ना केवल  बैठा है बल्कि आज भी दवा खरीदी कर रहा है। दरअसल 2018 में  काफी अनियमितताएं की थी  और उसकी शिकायत हुई थी, जांच हुई थी और  जांच में यह पाया गया था कि हां इन्होंने अनियमितताएं की हैं। उसके बाद तत्कालीन कलेक्टर दीपक सिंह ने स्वास्थ्य कमिश्नर स्वास्थ्य को पत्र लिखा भोपाल में कि यह जो दिलीप पटेल हैं इन पर आरोप साबित हो गए हैं। इन्हें तत्काल सेवा से मुक्त किया जाए लेकिन आज तक वह सेवा से मुक्त नहीं हो पाए है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं यशपाल सिंह सिसोदिया उन्होंने विधानसभा में प्रश्न भी लगाया विधानसभा में भी जवाब आया है कि यह भ्रष्ट हैं। इन पर भ्रष्टाचार के  आरोप सिद्ध हुए हैं।  इन्हें हटाए जाने की कारवाई चल रही है।  लेकिन सवाल यह हैं कि यह कार्रवाई कीतनी लंबी हैं जो 7 साल से चल रही हैं 2018 की शिकायत थी दोषी पाए गए और अब 2025 में हम बात कर रहे हैं ओर वहां दिलीप पटेल बाकायदा आज भी शासन को चूना लगा रहा है। शासन कैसे चलता है? एक कर्मचारी जो संविदा का है जिस पर आरोप है, गंभीर आरोप है दवा खरीदी के उस पर विधानसभा में क्वेश्चन आ गया। विधायक चिट्ठी लिख रहे हैं, कलेक्टर चिट्ठी लिख रहे हैं। लेकिन ऐसी क्या सरकार की मजबूरी हैं कि उसका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पा रहा है। वास्तव में मप्र अजब हैं और गजब भी हैं।