छतरपुर। 
मध्यप्रदेश को अक्सर “अजब” कहा जाता है, लेकिन छतरपुर जिले से सामने आया एक ताज़ा मामला इस कहावत को नए अंदाज़ में साबित करता दिखाई दे रहा है। यहां पुलिस चौकी के लॉक-अप में अपराधी नहीं, बल्कि एक मुर्गी बंद मिली। मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो गया और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। लोग तंज कस रहे हैं कि “जहां अपराधी खुले घूम रहे हों, वहां मुर्गी हवालात में बंद है।”
पूरा मामला छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र की अक्टोहा पुलिस चौकी का बताया जा रहा है। वायरल हो रहे करीब 38 सेकंड के वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चौकी के बंदी गृह यानी लॉक-अप के अंदर एक मुर्गी आराम से घूम रही है, जबकि लॉक-अप का दरवाजा बाहर से बंद है। वीडियो बना रहा व्यक्ति व्यंग्य करते हुए कहता सुनाई देता है – “ये देखो अक्टोहा चौकी का हाल… यहां मुर्गी को हवालात की हवा खिलाई जा रही है।” यही संवाद अब सोशल मीडिया पर मीम और टिप्पणियों का हिस्सा बन गया है।
वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। ग्रामीणों का कहना है कि चौकी में रात के समय अक्सर “मुर्गा पार्टी” होती है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने रात में खाने के लिए किसी ग्रामीण से मुर्गी मंगवाई थी और उसे भागने से रोकने के लिए लॉक-अप में बंद कर दिया गया। गांव के कुछ लोगों का दावा है कि उन्होंने शाम के समय एक व्यक्ति को मुर्गी लेकर चौकी में जाते देखा था। सुबह जब लॉक-अप में मुर्गी दिखी तो किसी ने वीडियो बना लिया और मामला सोशल मीडिया पर फैल गया।
ग्रामीणों की नाराज़गी सिर्फ एक मुर्गी तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि जिस लॉक-अप का इस्तेमाल अपराधियों को बंद करने के लिए होना चाहिए, वहां इस तरह की हरकत पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कई लोगों ने इसे पुलिस की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर भी यूजर्स लगातार टिप्पणी कर रहे हैं कि “एमपी पुलिस का नया कैदी”, “मुर्गी गिरफ्तार”, और “लॉक-अप में वीआईपी सुरक्षा” जैसे व्यंग्यात्मक पोस्ट तेजी से शेयर हो रहे हैं।
हालांकि मामला बढ़ने और वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सफाई भी दी है। अक्टोहा चौकी प्रभारी का कहना है कि मुर्गी किसी ग्रामीण की थी जो भटककर चौकी परिसर में आ गई थी। उनका दावा है कि उसे कुत्तों और अन्य जानवरों से बचाने के लिए अस्थायी रूप से लॉक-अप में रखा गया था ताकि मालिक मिलने तक वह सुरक्षित रहे। पुलिस का कहना है कि इस मामले को बेवजह बढ़ाया जा रहा है और इसमें किसी तरह की “पार्टी” जैसी बात नहीं है। लेकिन पुलिस की इस सफाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि अगर मुर्गी को सुरक्षित रखना ही उद्देश्य था तो चौकी में और भी कई जगहें थीं, फिर बंदी गृह ही क्यों चुना गया? वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह घटना भले छोटी लगे, लेकिन इससे पुलिस चौकियों की कार्यसंस्कृति और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
अब यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पुलिस अपनी सफाई दे रही है, तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर यह वीडियो लगातार वायरल हो रहा है और लोग इसे “अजब एमपी” का नया उदाहरण बता रहे हैं।