सिंगरौली/भोपाल। 
राजनीति में कहा जाता है कि "अति सर्वत्र वर्जयेत" (अति हर जगह वर्जित है), और सिंगरौली विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल के लिए यह कहावत अब गले की फांस बनती नजर आ रही है। महज 24 घंटे पहले मिली कुर्सी पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निगम-मंडलों में नियुक्त होने वाले नेता सादगी अपनाएं, काफिले और दिखावे से दूर रहें। लेकिन वीरेंद्र गोयल ने इन निर्देशों को 'धुआं' उड़ाते हुए सिंगरौली में गाजे-बाजे और कारों के लंबे काफिले के साथ एंट्री मारी। काफिले की वजह से पूरा सिंगरौली शहर जाम हो गया।  अनुशासन की नसीहतों के बीच डीजे की धमक और समर्थकों के शोर ने संगठन को नाराज कर दिया है। खबर है कि कार्रवाई की भनक लगते ही गोयल जी बीच रास्ते में गाड़ी छोड़कर इलेक्ट्रिक ऑटो में बैठ गए, लेकिन तब तक वीडियो भोपाल दरबार पहुंच चुके थे।
संगठन का 'हंटर' तैयार: सज्जन सिंह यादव का उदाहरण सामने
भारतीय जनता पार्टी इस समय अनुशासन को लेकर बेहद सख्त है। इसका ट्रेलर हाल ही में भिंड में देखने को मिला, जहां किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव को 100 गाड़ियों का काफिला निकालने के जुर्म में पदमुक्त कर दिया गया। अगर सज्जन सिंह पर गाज गिर सकती है, तो वीरेंद्र गोयल पर क्यों नहीं? क्या पार्टी में 'दो विधान' चलेंगे? सूत्रों की मानें तो भेदभाव के आरोप से बचने के लिए संगठन गोयल पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
नियुक्ति का विवादों से पुराना नाता
वीरेंद्र गोयल की यह नियुक्ति शुरू से ही चर्चा में रही है:

  • 9-10 मई: एक नियुक्ति पत्र वायरल हुआ, जिसे सरकार ने 'फर्जी' करार दिया।
  • 13 मई: सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन्हें अध्यक्ष बनाया।
  • 14 मई: पदभार ग्रहण करते ही अनुशासनहीनता का ठप्पा लग गया।

क्या आज रात गिर जाएगी गाज?
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल अपनी सादगी और अनुशासनप्रियता के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री और संगठन के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि एक या दो दिन में सुबह तक वीरेंद्र गोयल को पद से हटाने का आदेश जारी हो सकता है।