एक साथ जन्मे चारों नवजातों की मौत...मां की हालत स्थिर:350 से 600 ग्राम के बीच था वजन, फेफड़े विकसित नहीं होने से सांस नहीं ले पा रहे थे
छिंदवाड़ा।
छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में कुदरत का करिश्मा त्रासदी में बदल गया। सोमवार को एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश चारों नवजातों की मौत हो गई। दो बच्चों ने जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रेफर के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि शेष दो बच्चों ने छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में अंतिम सांस ली। गनीमत रही कि प्रसूता की जान बच गई। उसकी हालत स्थिर है।
अत्यधिक कम वजन बना मौत की वजह
एसएनसीयू के नोडल अधिकारी डॉ. अंशुल लाम्बा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती कराए गए दो नवजातों में एक बालिका का वजन 600 ग्राम और एक बालक का वजन महज 350 ग्राम था। अत्यधिक कम वजन होने के कारण दोनों बच्चों के फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। सांस लेने में परेशानी के चलते पहले बालिका ने देर रात दम तोड़ा, जबकि बालक ने मंगलवार तड़के करीब 3:30 से 4 बजे के बीच अंतिम सांस ली।
चार भ्रूण को विकास नहीं हो सका
डॉक्टरों के अनुसार जुन्नारदेव क्षेत्र में कुपोषण एक बड़ी चुनौती है और यहां अकसर कम वजन के बच्चों के जन्म के मामले सामने आते हैं। हालांकि सामान्य तौर पर नवजातों का वजन 2 किलो या उससे अधिक रहता है। इस मामले में महिला के गर्भ में एक साथ चार बच्चे होने के कारण किसी भी भ्रूण का समुचित विकास नहीं हो पाया, जिससे फेफड़े और अन्य जरूरी अंग सही आकार नहीं ले सके।
पूरी मेडिकल टीम जुटी रही
नवजातों को बचाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. सुशील दुबे, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. पवन नादुरकर, आरएमओ डॉ. हर्षवर्धन कुढ़ापे सहित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम लगातार प्रयासरत रही, लेकिन बच्चों का वजन जीवित रहने के लिए जरूरी न्यूनतम मानक से काफी कम होने के कारण मेडिकल साइंस की कोशिशें नाकाम रहीं।

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