छिन्दवाड़ा। 
 छिंदवाड़ा के परासिया विकासखंड में किडनी इन्फेक्शन से नौ बच्चों की मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. नौ बच्चों में से 7 बच्चों का इलाज एक सरकारी डॉक्टर के निजी क्लीनिक में किया गया था.
डॉक्टर की पत्नी के नाम से ही है मेडिकल स्टोर
परासिया के सिविल अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवीन सोनी 15 दिन के अवकाश पर थे और और अपने निजी क्लीनिक में बच्चों का इलाज कर रहे थे. किडनी इन्फेक्शन से जिन नौ बच्चों की मौत हुई है उनमें से 7 बच्चों का इलाज डॉक्टर प्रवीन सोनी के क्लीनिक में हुआ था. और सभी को कोल्डरिफ और नेस्ट्रो डीएस दवाइयां दी गई थीं. खास बात यह है कि डॉक्टर के क्लीनिक के बाजू में ही उनकी पत्नी "अपना मेडिकल" के नाम से मेडिकल स्टोर चलाती हैं, जहां से दवाइयां बेची गई थीं.
परासिया एसडीएम शुभम कुमार यादव ने बताया है कि नौ में से 7 बच्चों का इलाज डॉक्टर प्रवीन सोनी के निजी क्लीनिक में किया गया था. चूंकि वह काफी सीनियर शिशु रोग विशेषज्ञ हैं अधिकतर लोग उनके पास इलाज करने जाते हैं. अगर वे छुट्टी लेकर निजी क्लीनिक में इलाज कर रहे थे तो इसकी जांच के बाद मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी.
डॉक्टर प्रवीन सोनी का कहना है कि वह कहीं बाहर जाने वाले थे लेकिन अचानक उनका प्रोग्राम कैंसिल हो गया. लगातार मौसमी बीमारी के मरीज उनके पास आ रहे थे तो इंसानियत के नाते वे उनका इलाज कर रहे थे. उनके पास हर दिन 100 से 200 बच्चे इलाज के लिए आते हैं. जिनमें से अधिकतर को वे यही सिरप लिख रहे थे.

जबलपुर से सफ्लाई हुई थी कफ सिरप

छिन्दवाड़ा ड्रग इंस्पेक्टर गौरव शर्मा ने बताया "दो सिरप के स्टॉक को बैन किया गया है, जो जबलपुर के कटारिया फार्मा से छिंदवाड़ा के तीन फार्मा की दुकानों को सप्लाई किया गया था. coldrif सिरप की 660 बोतल दवाइयां के स्टॉक में से 594 छिंदवाड़ा की तीन फार्मा दुकानों को भेजा गया था. छिंदवाड़ा की तीनों फार्मा के पास से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जब्त की गई है.

डॉक्टर ने कहा, कई सालों से लिख रहे हैं हम दवाइयां

वहीं बच्चों का निजी क्लीनिक में इलाज करने वाले डॉक्टर प्रवीन सोनी ने ईटीवी भारत को बताया कि वे करीब 40 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं. जिसमें से 15 सालों से सर्दी, जुकाम और बुखार के लिए बच्चों को लगातार ये दवाइयां देते आ रहे हैं. लेकिन ऐसा मामला कभी नहीं आया है. अगर दवाई में कोई गलती है तो इसके लिए वह जिम्मेदार नहीं हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि आखिर इन दवाइयां में क्या समस्या है.