छतरपुर रामलीला के अद्भुत कलाकार, दिन में कराते हैं कोर्ट में पेशी, रात में बन जाते हैं रावण
छतरपुर।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में प्राचीन और अद्भुत रामलीला खेलने की परंपरा आज भी जिले के कलाकार जीवित रखे हुए हैं. पिछले 75 सालों से चल रहे रामलीला मंचन की शुरुआत 1950 में हुई थी. नवरात्रि के पहले रामलीला का शुभारंभ किया जाता है. यह आयोजन 14 दिनों तक अनवरत चलता है. श्री अन्यपूर्णा रामलीला खेलने वाले निःशुक्ल 14 दिन तक अपनी सेवाएं देते हैं. इस रामलीला में शहर के व्यापारी, समाजसेवी, वकील, पत्रकार, सरकारी कर्मचारी अभिनय करते हैं और प्राचीन परंपरा को आज भी 75 सालों से जीवित रखे हुए हैं.
अन्नपूर्णा रामलीला समिति मना रही अमृत महोत्सव
छतरपुर के पुराने शहर के अंदर चलने वाली श्री अन्नपूर्णा रामलीला समिति इस वर्ष अमृत महोत्सव मना रही है. 75 वर्ष पूरे होने पर इस बार रामचरितमानस भवन प्रांगण में सात दिवसीय श्रीराम महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का भी आयोजन किया गया. 75 सालों से स्थानीय कलाकार रामलीला के विभिन्न चरित्रों का मंचन करते आ रहे हैं. पंडित राजीव लोचन दास महाराज के मुखारविंद से कथा सुनाई जा रही है. शाम को रामलीला समिति द्वारा रामलीला का मंचन भी किया जा रहा है.
कलेक्टर-SP ने की भगवान के स्वरूपों की आरती
छठवें दिन रामलीला के आयोजन में छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल, SP अगम जैन, SDM अखिल राठौर भगवान के स्वरूपों की आरती करने पहुंचे. रामलीला की शुरुआत से पहले कलेक्टर, SP और SDM ने आरती की और आयोजन को लेकर समिति को धन्यवाद दिया. कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कहा, ''समिति के लोग आज भी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं, यह बहुत बड़ी बात है.'' समिति के लोगों ने कलेक्टर, SP और SDM का सम्मान किया और छठवें दिन की रामलीला का मंचन शुरू हुआ. रामलीला में सीता स्वयंवर और धनुष यज्ञ का सजीव मंचन हुआ, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए.
सुबह अदालत जाते हैं, शाम को रावण का निभाते हैं किरदार
छतरपुर श्री अन्नपूर्णा रामलीला के कलाकार रावण का मंचन करने वाले एडवोकेट लखन राजपूत बताते हैं, ''हम लोग समिति और जन सहयोग से रामलीला खेलते हैं. इस वर्ष 75 साल पूरे हो गए और अमृत महोत्सव माना रहे हैं. रावण का रोल करना बहुत कठिन है. मंच पर उतरने से पहले हम स्नान करते हैं और भगवान राम का स्मरण करते हैं ताकि कोई गलती ना हो जाये.'' एडवोकेट लखन राजपूत बताते हैं, ''हम सुबह पहले अदालत जाते हैं जिनकी पेशियों होती हैं उनको भी निपटाते हैं. शाम को रामलीला में निशुक्ल रावण का मंचन करते हैं.''
'भगवान के हाथों मारा जाना मेरा सौभाग्य'
छतरपुर के जाने माने व्यापारी अखिलेश मातेले उर्फ डालडा रामलीला में कुंभकर्ण का मंचन करते हैं. डालडा बताते हैं, ''मैं पिछले 10 सालों से रामलीला में कुंभकर्ण का रोल निभाता आ रहा हूं. दिन में अपनी जनरल स्टोर की दुकान चलाता हूं और शाम होते ही कुंभकर्ण का मंचन करता हूं.'' डालडा कहते हैं, ''यह मेरा सौभाग्य है की हम को कुंभकर्ण का रोल करने को मिल मिल रहा है. भगवान के हाथों मारा जाना मेरे लिए सौभाग्य है.''

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