छतरपुर। 
 धरती पर सबसे वफादार पशु डॉगी को माना जाता है. इंसान भी पशुओं को पालकर उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं. अभी तक आप लोगों ने पशु-पक्षी से इंसान के लगाव की कई घटनाएं सुनी होंगी. लेकिन ऐसे जुड़ाव की घटना पहली बार देखने को मिली कि एक पालतू डॉगी की मौत पर उसका सारा क्रियाकर्म परिवार के सदस्य की तरह किया जाए. मामला छतरपुर जिले के राजनगर तहसील में पड़ने वाले गांव पिपट का है.
डॉगी की अंतिम यात्रा में गूंजा 'राम नाम सत्य है'
पिपट गांव में रहने वाले राम संजीवन पटेरिया उर्फ सिद्दू महाराज ने अपने घर में पाले गए डॉगी की मौत के बाद उसे भावभीनी विदाई दी. डॉगी की बाकायदा घर से श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा निकाली गई. इसमें गांव के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए. अंतिम यात्रा में 'राम नाम सत्य है' के नारे लगे. विधिवत तरीके से डॉगी का अंतिम संस्कार किया. शोकसभा का आयोजन किया गया. पेट लवर सद्दू महाराज ने डॉगी के अंतिम संस्कार से पहले बाकायदा अपना मुंडन कराया.
तेरहवीं के भोज में सारे पशु-पक्षी आमंत्रित
पेट लवर सद्दू महाराज बताते हैं "उनके डॉगी जिसका नाम तिलकधारी था, उसने वृद्धावस्था में दम तोड़ दिया. अब उसकी अस्थि विसर्जन प्रयागराज कराने के लिए वह जा रहे हैं. वहां से लौटने के बाद अन्य क्रियाकर्म भी कराए जाएंगे. मृत्यु के तेरहवें दिन यानि 01 अक्टूबर को बड़े भोज का कार्यक्रम रखा गया है. इसमें पूरे गांव के डॉगी और पशु-पक्षियों को सब्जी-पूड़ी, हलवा आदि का भोज कराया जाएगा.
10 साल पहले जन्मे डॉगी की कहानी
पेट लवर सद्दू महाराज बताते हैं "10 साल पहले गांव की एक गली में डॉगी ने जिसका नाम रामकली था, उसने बच्चों को जन्म दिया था. कुछ दिन बाद ही रामकली की मौत हो गई. अन्य बच्चों की भी एक-एक करके मौत हो गई. लेकिन डॉगी का एक बच्चा बच गया था. डॉगी के बच्चे को बेसहारा देखकर उन्होंने उसे गोद ले लिया. उसका नाम रखा गया तिलकधारी. इसी दौरान डॉगी का नामकरण संस्कार का आयोजन करने के लिए पूरे गांव को आमंत्रित किया गया. सबको भोज कराया गया."