मप्र की राजधानी में ऐसा भी एक गांव... जहां सभी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं लेकिन सभी इनकम टैक्स पेयर भी हैं
भोपाल।
भोपाल. कहते हैं मध्य प्रदेश अजब है, सबे गजब है. यहां आए दिन एक से बढ़कर एक अजब-गजब कारनामें होते हैं. कुछ ऐसा ही होश उड़ाने वाले मामला राजधानी भोपाल से भी सामने आया है यहां एक ऐसा गांव है जहां सभी गरीब है. नलखेड़ा गांव में 240 परिवार हैं. सभी गरीबी रेखा के नीचे हैं. हैरानी की बात यह है कि सभी 240 परिवारों को मुफ्त अनाज योजना का लाभ भी मिलता है. केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है.बताया जा रहा है कि गांव के लोगों को सरकारी की ओर से बीपीएल राशन कार्ड भी मिला है. इस कार्ड पर हर महीने राशन भी ग्रामीणों को दिया जा रहा है.पूरे का पूरा गांव जब बीपीएल मिला तो शक हुआ. राशन कार्ड फर्जीवाड़ा को लेकर हुए इस खुलासे के बाद अधिकारी भी हैरान हैं. बताया जा रहा है कि गांव में कुछ लोग जो अपने पिता से अलग होकर रह रहे हैं, उन्हीं ही खाद्यान्न योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. गांव में पक्के मकान हैं. लोगों को पास गाड़ियां भी हैं.
सरपंच प्रतिनिधि बोले- गांव को बदनाम करने की साजिश
गांव के सरपंच प्रतिनिधि हरिनारायण मीणा का कहना है कि मेरे कार्यकाल में एक भी बीपीएल कार्ड नहीं बना है. खाद्यान्न योजना में पात्रता के लिए सरकारी गाइडलाइन का पूरा ध्यान रखा गया है. कुछ दिन पहले एक टीम जरूर गांव में आई थी. उन्होंने सचिव या सरपंच से संपर्क नहीं किया. अपने हिसाब से एक सर्वे करके ले गई है. मुझे लगता है गांव को बदनाम करने की साजिश है. जिला खाद्य नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन का कहना है कि सरकार की तरफ से जांच निर्देश मिले थे. जांच दल गठित कर विभाग मामले की जांच कर रहा है. हमे भी जानकारी मिली थी उस गांव में सभी बीपीएल सूची है, जबकि इस सूची में जो लोग है उनमें से कई लोग टैक्स पेयर भी है, कुछ सरकारी नौकरी करते है. वहीं कुछ लोगों ने अपने नाम कंपनी भी रजिस्टर्ड करा रखी है. गांव के हितग्रा,ही जो खाद्यान्न योजना का लाभ ले रहे हैं, उनका कहना है कि लंबे समय से खाद्यान्न योजना का लाभ उन्हें मिल रहा है. जिन लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है उनका कहना है कि वह पहले अपने पिता के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे. लेकिन शादी के बाद उन्होंने परिवार आईडी अलग कराई है. उसके बाद उनको खाद्यान्न मिलना बंद हो गया है. इसको लेकर वे कई बार जनपद के चक्कर भी काट चुके हैं, लेकिन अब तक उनका खाद्यान्न शुरू नहीं हुआ है.

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